• August 22, 2017

    ‘आज़ादी कूच’ : एक सम्भावना-सम्पन्न आन्दोलन के अन्तरविरोध और भविष्य का प्रश्न

    हम एक बार यह भी स्पष्ट करना चाहेंगे कि हमारी इस कॉमरेडाना आलोचना का मकसद है इस आन्दोलन के सक्षम और युवा नेतृत्व के समक्ष कुछ ज़रूरी सवालों को उठाना जिनका जवाब भविष्य में इसे देना होगा। आज समूचा जाति-उन्मूलन आन्दोलन और साथ ही हम जैसे क्रान्तिकारी संगठन व व्यक्ति जिग्नेश मेवानी की अगुवाई में चल रहे इस आन्दोलन को उम्मीद, अधीरता और अकुलाहट के साथ देख रहे हैं। किसी भी किस्म का विचारधारात्मक समझौता, वैचारिक स्पष्टवादिता की कमी और विचारधारा और विज्ञान की कीमत पर रणकौशल और कूटनीति करने की हमेशा भारी कीमत चुकानी पड़ती है, चाहे इसका नतीजा तत्काल सामने न आये, तो भी।

  • July 30, 2017

    भारत में सूचना तकनीक (आईटी) क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों पर लटकी छँटनी की तलवार

    मौजूदा हालात ये हैं कि आईआईटी जैसी संस्थाओं में से इस वर्ष 66 फ़ीसदी विद्यार्थी ही कैम्पस प्लेसमेण्ट के दौरान रोज़गार हासिल कर पाये। इंजीनियरिंग करने के बाद हालत यह है कि बड़ी संख्या में नौजवान गले में डिगरी लटकाकर नौकरी के लिए धक्के खा रहे हैं। जो रोज़गार हासिल करने में क़ामयाब हो भी जाते हैं, वे भी छोटी-छोटी कम्पनियों में 10 से 15 हज़ार तक वेतन पर लगातार छँटनी के डर से काम कर रहे हैं। आईटी क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में रोज़गार हासिल करना मध्यवर्ग का सपना रहा है। क़र्ज़ लेकर या अपनी जि़न्दगी की पूरी कमाई लगा कर मध्यवर्ग का एक बड़ा हिस्सा अपने बच्चों पर निवेश करता है। लेकिन अब यह सपना लगातार टूट रहा है।

  • July 30, 2017

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 – जनता के लिए बची-खुची स्वास्थ्य सुविधाओं को भी बाज़ार के मगरमच...

    इस नयी स्वास्थ्य नीति का सबसे घटिया पहलू निजी क्षेत्र के लिए राह साफ़ करना है। भारत में पहले ही स्वास्थ्य के कुल क्षेत्र में से 70% के क़रीब हिस्से पर निजी क्षेत्र का क़ब्ज़ा है जिनमें अपोलो, फ़ोर्टिस, मेदान्ता, टाटा जैसे बड़े कारपोरेट अस्पतालों से लेकर क़स्बों तक में खुले निजी नर्सिंग होम शामिल हैं। पिछले एक-डेढ़ दशक में कारपोरेट अस्पतालों का रिकाॅर्ड-तोड़ फैलाव हुआ है, इन्होंने एक हद तक निजी नर्सिंग होमों को भी निगल लिया है। इसके साथ ही बची-खुची सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के अन्दर भी निजी क्षेत्र की घुसपैठ बढ़ी है। ज़िला-स्तरीय अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और बड़े मेडिकल संस्थानों में प्राइवेट-पब्लिक-पार्टनरशिप के नाम पर बहुत सारी सुविधाएँ निजी हाथों में सौंपी जा चुकी हैं, या सौंपने की तैयारी है।

  • July 30, 2017

    यूनियन बनाने की कोशिश और माँगें उठाने पर ठेका श्रमिकों को कम्पनी ने निकाला, संघर्ष जारी

    केन्द्र में भाजपा की फासीवादी मोदी सरकार तो खुल्ले तौर पर मज़दूरों की विरोधी है ही लेकिन दिल्ली का ये नटवरलाल जो कि छोटे बनिये-व्यापारी का प्रतिनिधित्व करता है किसी भी मायने में मोदी से कम नहीं है! जिन तथाकथित ‘लिबरल जन’ का भरोसा इस नटवरलाल पर है और जो इसे मोदी का विकल्प समझ रहे हैं, उन्हें भी अब अपनी आँखे खोल लेनी चाहिए।

  • July 30, 2017

    ऑटोमैक्स में तालाबंदी के ख़ि‍लाफ़ आन्दोलन

    इस चीज की चर्चा करना भी जरूरी है कि इस कम्पनी में  पिछले 20-25 सालों में 30-40 श्रमि‍कों के हाथ कटे हैं और किसी का हाथ, बाजू, अंगूठा और कुछ श्रमिकों का तो एक बार ज़्यादा कटा है और कई श्रमिकों के तो पैर कटे हैं। आज तक किसी को कोई उचित मुआवजा नहीं मिला।