• May 21, 2017

    अर्थव्यवस्था चकाचक है तो लाखों इंजीनियर नौकरी से निकाले क्यों जा रहे हैं?

    पिछले कुछ महीनों में देश की सबसे बड़ी 7 आईटी कम्पनियों से हज़ारों इंजीनियरों और मैनेजरों को निकाला जा चुका है। प्रसिद्ध मैनेजमेंट कन्सल्टेंट कम्पनी मैकिन्सी ‍की रिपोर्ट के अनुसार अगले 3 सालों में हर साल देश के 2 लाख साफ्टवेयर इंजीनियरों को नौकरी से निकाला जायेगा। यानी 3 साल में 6 लाख। ऐसा भी नहीं है कि केवल आईटी कम्पनियों से ही लोग निकाले जा रहे हैं। सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कम्पनियों में से एक लार्सेन एंड टुब्रो (एल एंड टी) ने भी पिछले महीने एक झटके में अपने 14,000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। ये तो बड़ी और नामचीन कम्पनियों की बात है, लेकिन छोटी-छोटी कम्पनियों से भी लोगों को निकाला जा रहा है। आईटी सेक्टर की कम्पनियों की विकास दर में भयंकर गिरावट है। जिन्होंने 20 प्रतिशत का लक्ष्य रखा था उनके लिए 10 प्रतिशत तक पहुँचना भी मुश्किल होता जा रहा है। अर्थव्यवस्था की मन्दी कम होने का नाम नहीं ले रही है और नये रोज़गार पैदा होने की दर पिछले एक दशक में सबसे कम पर पहुँच चुकी है।

  • April 30, 2017

    उत्तर प्रदेश – क़र्ज़-माफ़ी के टोटके से खेती-किसानी का संकट नहीं हल हो सकता

    अक्सर इस बात को दृष्टिओझल कर दिया जाता है कि किसानों की क़र्ज़-माफ़ी से सरकार को पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी मुख्यत: गाँवों और शहरों की सर्वहारा आबादी को ही उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश में किसानों की क़र्ज़-माफ़ी का बोझ भी मज़दूर वर्ग पर पड़ने वाला है। ग़ौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा क़र्ज़-माफ़ी के लिए आर्थिक मदद करने से मना करने के बाद क़र्ज़-माफ़ी के लिए मुद्रा जुटाने के लिए योगी सरकार ने किसान राहत बॉण्ड जारी करने का फै़सला किया है। ज़ाहिर है कि उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व के 8 प्रतिशत से भी अधिक क़ीमत के इन बॉण्डों की सूद सहित भरपाई मज़दूर वर्ग को करनी पड़ेगी, क्योंकि इसके लिए जो अतिरिक्त कर लगाना होगा, उसका बोझ मुख्यत: मज़दूरों पर ही पड़ेगा।

  • April 30, 2017

    सेण्ट पीटर्सबर्ग का वह कार्यकाल जिसने लेनिन को मेहनतकश जनता के नेता के रूप में ढाला

    व्लादीमिर इलिच को उस हर छोटी बात में दिलचस्पी थी, जो मज़दूरों की जि़न्दगी और उनके हालात की तस्वीर को उभारने में मदद कर सके और जिसके सहारे वे क्रान्तिकारी प्रचार कार्य के लिए मज़दूरों से सम्पर्क क़ायम कर सकें। उस ज़माने के अधिकांश बुद्धिजीवी मज़दूरों को अच्छी तरह नहीं जानते थे। वे किसी अध्ययन मण्डल में आते और मज़दूरों के सामने एक तरह का व्याख्यान पढ़ देते। एंगेल्स की पुस्तक ”परिवार व्यक्तिगत सम्पत्ति और राज्य की उत्पत्ति” का हस्तलिखित अनुवाद बहुत दिनों तक गोष्ठियों में घूमता रहा। व्लादीमिर इलिच मज़दूरों को मार्क्स का ग्रन्थ पूँजी पढ़कर सुनाते और उसे समझाते। वे अपने पाठ का आधा समय मज़दूरों से उनके काम और मज़दूरी के हालात के विषय में पूछने पर लगाते। और इस प्रकार उन्हें दिखाते और बताते कि उनकी जि़न्दगी समाज के पूरे ढाँचे के लिए क्या महत्त्व रखती है तथा वर्तमान व्यवस्था को बदलने का उपाय क्या है? अध्ययन मण्डलों में सिद्धान्त को व्यवहार से इस प्रकार जोड़ना व्लादीमिर इलिच के कार्य की विशेषता थी। धीरे-धीरे हमारे अध्ययन मण्डलों के अन्य सदस्यों ने भी यह तरीक़ा अपना लिया।

  • April 30, 2017

    रेलवे का किश्तों में और गुपचुप निजीकरण जारी

    नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र की भाजपा सरकार ने भारतीय रेल के निजीकरण का मन बना लिया है और क्रमिक ढंग से यह सिलसिला चालू भी कर दिया है। अभी हाल ही में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगे जुड़वा शहर हबीबगंज का रेल स्टेशन म.प्र. की निजी कम्पनी बंसल पाथवे के हवाले कर दिया गया है। यह कम्पनी न सिर्फ़ इस स्टेशन का संचालन करेगी बल्कि रेलगाड़ियों के आवागमन का भी नियन्त्रण करेगी। जुलाई 2016 में कम्पनी के साथ किये गये क़रार के अन्तर्गत कम्पनी हवाई अड्डों के तर्ज पर रेलवे स्टेशन की इमारत का निर्माण करेगी और स्टेशन की पार्किंग, खान-पान सब उसके अधीन होगा और उससे होने वाली आमदनी भी उसकी होगी।

  • April 30, 2017

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 और मज़दूर वर्ग पर उसका असर

    स्वास्थ्य जैसी समाज की मूलभूत ज़रूरत के प्रति सरकार ने जो नीति बनाई है, वह एक छोटे से धनाढ्य वर्ग और मध्य वर्ग के हित में है। पूँजीपति वर्ग मज़दूर के शोषण से एकत्रित की हुई पूँजी के कारण या तो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में धन्धा करेगा या फिर इन सेवाओं का उपभोक्ता होगा। मज़दूर वर्ग को इस तरह की नीतियाँ हमेशा भगवान व भाग्य के भरोसे ही रख छोड़ती हैं। इस नाइंसाफ़ी के ख़ि‍लाफ़ मज़दूर आवाज़ न उठा दें, इसलिए उसे बहलाने के और भी तरीक़े सरकार को आते हैं। आजकल सियासी जुमलों की बहुतायत है। जब स्वास्थ्य की चर्चा होती है तो स्वच्छ भारत अभियान, कुपोषण विरोधी अभियान, नशामुक्ति अभियान, रेल-रोड यात्री सुरक्षा अभियान, लिंग परीक्षण विरोधी अभियान, तनाव मुक्ति अभियान, वायु व जल प्रदुषण से मुक्ति और योग और व्यायाम का महत्व इत्यादि मुद्दों पर ही बातें होती हैं, परन्तु अगर तार्किक ढंग से देखा जाये तो मनुष्य के स्वास्थ्य का सीधा सम्बन्ध तो पर्याप्त और पौष्टिक भोजन, न्यायसंगत वेतन, काम करने के सही तरीक़ों, सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता और सही शिक्षा से भी है।