मेहनतकश साथियो! नौजवान दोस्तो!
सोचो!
इतने साल तक
चुनावी मदारियों से
उम्मीदें पालने के बजाय
अगर हमने इंकलाब की राह चुनी होती
तो भगतसिंह के सपनों का भारत
आज एक हकीकत होता।
धार्मिक कट्टरपंथ पूंजीवादी चुनावी राजनीति की दोगली औलाद है
चुनावी मदारियों से पीछा छुड़ा लो!
समाजवादी क्रान्ति की राह अपना लो!













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