मज़दूर बिगुल अख़बार को घर-घर पहुँचाने की ज़रूरत है
राहुल, चिड़ी,
जिला रोहतक, हरियाणा
सम्पादक महोदय मेरा नाम राहुल है। मैं हरियाणा के चिड़ी गाँव का रहने वाला हूँ तथा बिगुल अखबार के कुछ ही अंक मैनें फ़िलहाल तक पढ़े हैं। मुझे बिगुल अखबार बहुत पसन्द आया। इसमें मुझे मेहनतकश लोगों मज़दूर-किसानों के जीवन से जुड़ी ख़बरें पढने को मिली जोकि अन्य अख़बारों में नहीं मिलती। मज़दूर बिगुल के माध्यम से मैनें लेनिन के जीवन के बारे में जाना और मुझे इनसे प्रेरणा मिली। देश दुनिया के मज़दूर आन्दोलनों, आर्थिक व्यवस्था, सरकारों की चालबाजियों को मैनें बिगुल अखबार के माध्यम से जाना। मेरा सुझाव है कि मज़दूर बिगुल में चित्र भी होने चाहियें। चित्र होते तो हैं किन्तु कम होते हैं। आम तौर पर कम पढ़े-लिखे मज़दूर लोगों को चित्र आकर्षित करते हैं। साथ ही मुश्किल शब्दों के साथ कोशिश करके आसान शब्द भी दिये जायें ताकि बिलकुल कम पढ़े-लिखे लोग भी इसे और भी आसानी से समझ सकें तथा जान सकें कि पूँजीपति उनका शोषण कैसे करते हैं और इससे कैसे छुटकारा पाया जाये। इससे इसका प्रचार ज़्यादा बढ़ेगा और फ़िर इसे पाक्षिक और साप्ताहिक भी किया जा सकता है। मैं अपने मज़दूर भाइयों से कहना चाहूँगा इसे घर-घर तक पहुँचाएँ। अपने रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी हरेक को इससे परिचित कराएँ। यह हमारा अपना अखबार है। इसे आगे बढ़ाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है। धन्यवाद।
मज़दूर बिगुल, जून 2018













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