वज़ीरपुर में ‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ के नेतृत्व में हड़ताल

बिगुल संवाददाता

पिछले दिनों वजीरपुर के गरम रोला मज़दूरों ने जुझारू हड़ताल कर मालिकों को अपनी माँगों पर झुका दिया। 10 से 16 अप्रैल तक चली इस हड़ताल की उपलब्धि यह रही कि मज़दूरों ने ख़ुद को ‘गरम रोला मज़दूर एकता समिति’ में संगठित कर लिया है। लम्बे समय से गरम रोलर के अन्दर लोहे की प्लेटों को तपाकर शीट बनाने वाले मज़दूरों ने भट्टीनुमा कारख़ानों में सस्ती मज़दूरी पर जानवरों की तरह खटने के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलन्द की है। आज के दौर में यह संघर्ष  महत्वपूर्ण है। जहाँ हर जगह मज़दूरों के संघर्षों को कुचला जा रहा है वहाँ यह छोटी जीत भी बहुत मायने रखती है।

वजीरपुर दिल्ली के बडे़ धातु उद्योग इलाको में से एक है। इस इलाके में करीब छोटी-बड़ी 700-800 कम्पनियाँ हैं जिनमें हज़ारो मज़दूर खटते हैं। गरम रोलर, ठंडा रोलर, पोलिश, सर्किल से लेकर प्लास्टिक  व अन्य छोटी-बड़ी फ़ैक्‍टरियों में 40-50 से लेकर 150-200 मज़दूर कार्यरत हैं।  मज़दूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 12-14 घण्टे भट्टियों पर काम करते हैं। गरम रोला कारखाने में हजार डिग्री से ऊँचे तापमान पर काम करने के कारण मज़दूरों को हर आधे घंटे में कारखाने से बाहर आना पड़ता है। लगभग हर घंटे इन्हें 1 बोतल पानी पीना पडता है। लगभग हर मज़दूर की त्वचा यहाँ काम करते हुए जल जाती है। इन्ही नारकीय परिस्थितियों में अपना खून और पसीना जलाकर मज़दूरों ने मालिको की तिजोरियां भरी हैं।

हड़ताल का घटनाक्रम

वजीरपुर इलाके में सक्रिय केन्द्रीय यूनियन यूटीयूसी (उटुक) का  अवसरवादी नेतृत्व लम्बे समय से मालिकों की दलाली कर रहा था परन्तु इस बार अवसरवादी नेतृत्व को किनारे कर गरम रोला मज़दूरों ने अपनी समिति बनायी जिसके अध्यक्ष एक मज़दूर रामदरश चुने गये। सामाजिक कार्यकर्ता रघुराज भी इस पूरे संघर्ष में मज़दूरों को संगठित करने का काम करते रहे।

10 तारीख से 26 फ़ैक्टरियो के मज़दूर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गये और श्रम कार्यालय में जाकर अपनी माँगों का ज्ञापन सौंपा। इसमें न्यूनतम मज़दूरी और ईएसआई लागू करने की प्रमुख माँग थी। मज़दूर  इलाक़े के ऊधमसिंह पार्क में धरना दे रहे थे। तभी से ही बौखलाए मालिक पुलिस के साथ मिलकर मज़दूरों के धरने को तोड़ने में जुट गये। 15 अप्रैल को पुलिस धरने से मज़दूरों को जबरन हटाने लगी। मज़दूरों को पीछा न हटता देख पुलिस समिति के नेतृत्व के साथियो को पकड़ कर ले जाने लगी तो मज़दूरों ने पुलिस थाने तक रैली निकालकर पुलिस के खिलाफ़ नारेबाज़ी की जिससे मजबूरन उन्हें मज़दूर नेताओं को छोड़ना पडा। 15 तारीख को ही मज़दूरों ने फिर श्रम आयुक्त का घेराव किया और अपना एक माँगपत्रक सौंपा जिसमे काम के घंटे 8 करने, न्यूनतम वेतन लागू करने और ईएसआई लागू करवाने की माँगें थीं। श्रम आयुक्त ने 17 तारीख को असिस्टेंट लेबर कमिशनर द्वारा कारखानों की जाँच करवाने का आश्वासन दिया। इससे 16 तारीख को ही मालिकों ने पुरज़ोर कोशिश की कि मज़दूरों की हड़ताल किसी भी हालत में ख़त्म कर दी जाये और पुलिस ने मालिक की शह पर 8 लोगों पर झूठा मुकदमा दायर करने की धमकी दी। पुलिस मालिको के द्वारा दिये जा रहे 1500 रुपए वेतन बढ़ोत्तरी, ईएसआई लागू करने, हड़ताल के दिनों के 4 दिन का वेतन देने और किसी भी मज़दूर को काम से न निकलने के ज़ुबानी आश्वासन पर मज़दूरों को हड़ताल ख़त्म करने का दबाव बनाने लगी। आखिर में मज़दूरों ने यह आंशिक सफलता स्वीकार करते हुए अपने साथियो को रिहा कराया।

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इस हड़ताल का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह रहा कि मज़दूरों ने अवसरवादी नेतृत्व को ख़ारिज कर अपना संगठन बनाया और हड़ताल कर मालिकों को अपनी माँगो पर आंशिक तौर पर झुकने के लिए मजबूर किया। 26 फ़ैक्टरि‍यों के मज़दूरों ने हर कारखाने की कमेटी बनाकर इस हड़ताल का संचालन किया जो ट्रेड यूनियन जनवाद की मिसाल है। यह हमारी इस लड़ाई के सकारात्मक पहलू रहे। अब गरम रोला मज़दूरों को आगे इन सकारात्मक अनुभवों को आगे बढ़ाते हुए क्या करना होगा? बिगुल मज़दूर दस्ता का यह मानना है कि गरम रोला मज़दूर एकता समिति को अपने संघर्ष को गरम रोला के मज़दूरों के साथ ठंडा रोला के मज़दूरों, सर्कल के मज़दूरों और पोलिश के मज़दूरों व वजीरपुर इलाके के सभी फ़ैक्टरियों के मज़दूरों के साथ जोड़ना होगा। 700 कारखानों में मज़दूरों की ज़्यादातर माँगें समान हैं। वजीरपुर इलाके के मज़दूर ऊधम सिंह पार्क, शालीमार बाग व सुखदेव नगर की झोपड़पट्टियों में रहते हैं और यहाँ मज़दूरों की आवास, पानी व अन्य साझा माँगें बनती हैं। इन सभी माँगों को समेटने और इस लड़ाई को व्यापक बनाने का काम एक इलाकाई यूनियन ही कर सकती है। इसलिए गरम रोला मज़दूर एकता समिति को विस्तारित कर या अलग से तुरन्त वज़ीरपुर इलाके की एक इलाकाई आधार पर यूनियन बनाने के लिए हमें संगठित होना होगा।

 

मज़दूर बिगुलअप्रैल-मई  2013

 


 

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