सियाचिन में खड़े जवान भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बटोरने का साधन हैं!
भाजपा समर्थक बात-बात पर सेना के जवानों की दुहाई देते हैं। नरेन्द्र मोदी पुलवामा के शहीद जवानों के नाम पर वोट माँगने में भी नहीं शर्माते। मगर इन्हीं जवानों की हालत क्या है? भारत के नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (सीएजी) की संसद में पेश रिपोर्ट के मुताबिक सियाचिन, लद्दाख, डोकलाम जैसे ऊँचे क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को ज़रूरत के अनुसार कैलोरी वाला भोजन नहीं मिल रहा। उन्हें वहाँ के मौसम से निपटने के लिए जिस तरह के ख़ास कपड़ों की ज़रूरत होती है उसकी ख़रीद में भी काफी देरी हुई। अभी सशस्त्र सीमा बल के 90,000 जवानों को जनवरी और फ़रवरी के वेतन के साथ उनके भत्ते नहीं मिलेंगे क्योंकि सरकार के पास पैसे नहीं हैं! कहने की ज़रूरत नहीं कि पैसे की कमी से मंत्रियों के ऐशो-आराम में कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा। पर जवानों के लिए पैसे नहीं हैं। कई शहीद जवानों की पत्नियों को उनके लिए घोेषित मुआवज़े की रकम पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता है और भूख हड़ताल तक का सहारा लेना पड़ता है।
यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सेना और अर्द्धसैनिक बलों में जवानों की बुरी हालत पर सवाल उठाने वाले कई जवानों को किस तरह प्रताड़ित किया गया है। और कारगिल की लड़ाई में मरने वाले सैनिकों के लिए ताबूतों की ख़रीद में घोेटाला भी भाजपा की सरकार में ही हुआ था! ये परम ढोंगी लोग हैं और केवल अपने मतलब के लिए सैनिकों की दुहाई देते हैं – उसी तरह, जैसे ये हिन्दू हितों की दुहाई देकर अपना उल्लू सीधा करते हैं।
मज़दूर बिगुल, फ़रवरी 2020













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