निर्माण मज़दूर की करण्ट लगने से मौत : मुआवज़े की माँग करने वालों को पुलिस ने भेजा जेल

– सुमित

नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एटीएस बिल्डर की निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम कर रहे एक मज़दूर की बिजली का करण्ट लगने के कारण मौत हो गयी। जिसके बाद मज़दूरों ने मृतक मज़दूर साथी के परिवार को आर्थिक मदद देने की माँग की। इनमें से अगुआ मज़दूरों को तोड़फोड़ करने का आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया। ज़ाहिर है, पुलिस प्रशासन पूरी तरह से बिल्डर की जेब में है क्योंकि मज़दूरों ने कुछ भी नाजायज़ नहीं माँगा था।
मृतक मज़दूर तरुण वासु पश्चिम बंगाल के मालदा का रहने वाला था। उसकी उम्र मात्र 19 वर्ष की थी। अभी 2 माह पहले वह पश्चिम बंगाल से नोएडा आया था। यहाँ पर पहले से काम कर रहे मालदा के मज़दूरों के साथ एटीएस में काम कर रहा था। तरुण के साथ काम करने वाले दूसरे मज़दूरों ने बताया कि रोज़ाना की तरह 9 अगस्त को हम सब काम कर रहे थे। शाम के लगभग 4 बजे तरुण जब एक मशीन का तार समेट रहा था तो वह बिजली का करण्ट लगने के कारण गिर गया, दूसरे मज़दूरों ने बिजली के तार को हटाया व तरुण को देखा तथा इसकी ख़बर सेफ़्टी ऑफ़िसर को दी। मज़दूर को पास के अस्पताल आरोग्य हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ पर डॉक्टरों ने मज़दूर तरुण को मृत घोषित कर दिया।
मालदा के मज़दूरों के मुंशी अनूप मण्डल जो ख़ुद मालदा पश्चिम बंगाल का रहने वाला है, ने बताया कि डॉक्टरों ने उसे बताया कि तरुण की मौत हो चुकी है तो उसने इस घटना के बारे में उसके परिवार को सूचित किया। उसके बाद पुलिस मृतक मज़दूर का शव पोस्टमार्टम के लिये ले गयी।
अनूप मण्डल ने बताया कि अगले दिन 10 अगस्त को एटीएस मैनेजमेण्ट ने मृतक तरुण के परिवार को 4.50 लाख का चेक, 50 हज़ार कैश व मृतक के शव को उसके घर पश्चिम बंगाल ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की और पोस्टमार्टम के बाद वे लोग अपने घर मालदा पश्चिम बंगाल लौट गये।
मृतक मज़दूर तरुण के साथ काम करने वाले मालदा के एक मज़दूर चन्दन ने बताया कि अगले दिन 10 अगस्त को मज़दूरों ने कम्पनी मैनेजमेण्ट से पूछा कि मृतक मज़दूर का शव कब तक आयेगा, तो बताया गया कि 11 बजे पोस्टमार्टम होगा उसके बाद पता चलेगा। मज़दूरों ने माँग की कि मृतक मज़दूर के मृत शरीर को यहाँ पर लाया जाये तथा उसके परिवार को 15 लाख की आर्थिक मदद दी जाये। मज़दूर शाम तक बैठे रहे। पुलिस की जीप आने पर 5 बजे के बाद कम्पनी की तरफ़ से बताया गया कि मृतक के परिवार की सभी माँगों को पूरा कर मृतक की बॉडी को उसके परिवार के साथ पश्चिम बंगाल भेज दिया गया है। मज़दूर समझ गये कि उन्हें झाँसा दिया जा रहा है ताकि वहाँ से वापस भेजा जा सके। इससे मज़दूर आक्रोशित हो गये और एटीएस के ऑफ़िस में घुस गये व उन्होंने पुलिस को भी खदेड़ दिया। इसके बाद रात में 12 बजे पुलिस बड़ी संख्या में आयी और मज़दूरों की झुग्गियों में ज़बरन घुस कर मज़दूरों को बहुत मारा-पीटा व बहुत से मज़दूरों को उठा कर ले गयी। जिनमें से 25-30 को जेल भेज दिया, जेल जाने वालों में बहुत से ऐसे मज़दूर हैं जो घटना के समय वहाँ पर उपस्थित भी नहीं थे।
इस घटना के बाद से बहुत से मज़दूर वापस अपने घर लौट गये हैं, जो मज़दूर अभी वहाँ पर हैं उनको भी काम पर नहीं लिया जा रहा है। इसके बारे में पूछने पर एटीएस मैनेजमेण्ट ने बताया कि मज़दूरों का वेरिफ़िकेशन किया जा रहा है इसलिए अभी काम रोक दिया गया है; जिन मज़दूरों का वेरिफ़िकेशन हो जायेगा उनको काम पर रख लिया जायेगा।
यह ऐसी अकेली घटना नहीं है जब काम के वक़्त होने वाले हादसों में मज़दूरों की मौत होती है। हमारे ये भाई-बहन मालिकों, कम्पनियों, ठेकेदारों के मुनाफ़े की भेंट सिर्फ़ इसलिए चढ़ जाते हैं क्योंकि कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा के उचित इन्तज़ाम नहीं किये जाते हैं। उसके बाद, जब मालिकों की मुनाफ़ाख़ोरी के कारण की गयी इस लापरवाही की भेंट मज़दूर चढ़ जाते हैं, तो उन्हें उचित क़ानूनी मुआवज़ा भी नहीं दिया जाता। और अगर मज़दूर अपने मृत साथी के लिए इन्साफ़ की माँग करते हैं, तो पूँजीपतियों की जेब में बैठी पुलिस उन्हें मारती-पीटती है और उन्हें जेलों में डाल दिया जाता है। लेकिन मालिक पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वैसे भी ऐसी दुर्घटनाओं के लिए बस मुआवज़े की व्यवस्था है। क़ानूनी तौर पर भी मालिक को इस प्रकार की जानलेवा लापरवाही के लिए कभी जेल नहीं भेजा जाता। क्या एक मज़दूर की जान को केवल रुपयों में तौला जा सकता है? लेकिन यदि मज़दूर अपनी जायज़ माँगों को उठाते हैं, तो उनपर लाठियाँ बरसायी जाती हैं और उन्हें सलाखों के पीछे धकेल दिया जाता है। नोएडा की इस घटना ने एक बार फिर मौजूदा मुनाफाख़ोर और कफ़नखसोट पूँजीवादी व्यवस्था की कलई खोल दी है। जब तक हम एकजुट और संगठित नहीं होते, तब तक हमारे साथ ऐसा ही सुलूक होता रहेगा।

मज़दूर बिगुल, सितम्बर 2021


 

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