मज़दूर बस्तियों से
मज़दूर स्त्रियों का फ़ैक्ट्री जाना मज़दूर वर्ग के लिए अच्छी बात है!
आनन्द
अब यह कहना ग़लत होगा कि औरत पैर की जूती है और वह तभी अच्छी लगती है, जब तक परदे के पीछे है, जब तक चूल्हा, बर्तन, बच्चे सँभालती है और आँख मूँदकर मर्द की सेवा करती है। क्योंकि अब मज़दूर औरतें भी समाज की इस कूपमण्डूकता और जकड़न को तोड़ रही हैं। वे अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। नीचे कुछ तथ्य दिये हैं, इन पर विचार कीजिये:
1. नीलम उपाधयाय (दरभंगा, बिहार) की उम्र क़रीब 32 वर्ष है, पति नहीं हैं। सास के साथ रोज़ खटपट होती थी, सो अकेले कमरा लेकर रह रही हैं। दो छोटे लड़के हैं, जिन्हें सास-ससुर ने नीलम के साथ नहीं आने दिया। अकेले रहते हुए भी काम करती हैं, और अपनी आजीविका चला रही हैं।
2. रेखा की माँ (बिहार) नौकरी करती हैं। पति भी काम करते हैं। दो लड़कियाँ हैं, और अब फिर माँ बनने वाली हैं। मगर काम पर जाती हैं।
3. रोशन जहाँ/हनीफ़ जहाँ, उन्नाव, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उम्र दोनों की लगभग 30 वर्ष है और दोनों फ़ैक्ट्री में काम करते हैं, क्योंकि गाँव में उनका कुनबा बड़ा है। हनीफ़ का कहना है,”खेतों में 24 घण्टे काम करते थे। एक धेला हाथ नहीं लगता था। बीबी के साथ दो पल बिताना भी नसीब नहीं होता था। इसलिए शहर आ गये। बाप आया था लेने मगर अब हम कभी नहीं जायेंगे।”
4. रामप्यारी उर्फ कीनू (बांगरमऊ, उत्तर प्रदेश की रहने वाली) की उम्र करीब 30 वर्ष है, दो बच्चे हैं। उनको अच्छे स्कूल में पढ़ा रही है। टयूशन लगा रखी है। पति-पत्नी दोनों फ़ैक्ट्री में काम करते हैं।
5. नन्हें की पत्नी, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश की रहने वाली है। दोनों की उम्र लगभग 28 वर्ष है और इनकी एक लड़की है। आँखों में बेहतर भविष्य का सपना लिये, दोनों पति-पत्नी कारखाने में काम करते हैं।
6. सावित्री देवी कन्नौज, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हैं। पति-पत्नी की उम्र क्रमश: 70 वर्ष और 62 वर्ष है। दो लड़के हैं। घर बनवाया व बड़े लड़के की शादी की जिसमें करीब 2 लाख रुपये कर्ज हो गये। घर व कुछ बीघा खेत बचाने के लिए सावित्री जी, पति महेन्द्र सिंह, बड़ा लड़का, नवविवाहित बहू, ये सभी फ़ैक्ट्री में काम करते हैं।
7. पूनम की मम्मी (दरभंगा, बिहार) गाँव में दो वक्त क़ी रोटी का इन्तज़ाम बड़ी मुश्किल से कर पा रही थीं। सो एक साल पहले पति-पत्नी, तीन लड़कियाँ और एक लड़का, पूरा परिवार दिल्ली आ गया। पति-पत्नी ने तो तभी फ़ैक्ट्री में काम पकड़ लिया, मगर उससे भी घर की दरिद्रता दूर न हुई तो इधर छह महीने से 15 वर्षीय पूनम ने भी फ़ैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया है।
8. राजन महतो और उनकी पत्नी (बिहार) दोनों की उम्र लगभग 32-35 वर्ष है। महतो जी पहले स्टील प्लाण्ट में काम करते थे। काम छूटने के बाद रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। इनके दो लड़कियाँ व एक लड़का है। इनकी कमाई से घर का गुज़ारा मुश्किल से चल रहा है। इसलिए अब पत्नी ने भी फ़ैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया है।
9. हरिकिशन (बिहार) की उम्र करीब 22 साल है। ये तीन भाई हैं। हरिकिशन कम्पनी के लिए वेल्डिंग का काम करते हैं। इनके पिता पानी का कैन सप्लाई करते हैं। इनकी मम्मी भी फ़ैक्ट्री में काम करती हैं।
10. हीरालाल और उनकी पत्नी (आजमगढ़, उत्तर प्रदेश) दोनों की उम्र 35 से 40 के बीच है। इनके तीन लड़के और दो लड़कियाँ हैं। पहले हीरालाल फ़ैक्ट्री में काम करते थे, मगर अकेले घर का आर्थिक संकट न झेल सके, इसलिए अब पत्नी भी फ़ैक्ट्री जाने लगी हैं।
हमारे आसपास ऐसे तमाम उदाहरण हैं जिनमें स्त्रियों ने मजबूरी में फ़ैक्ट्री जाना शुरू किया या अपनी आज़ादी के लिए गर्व से यह रास्ता चुना। मज़दूर मुक्ति के लिए ज़रूरी है कि स्त्रियाँ आत्मनिर्भर हों, और पुरुषों के कन्धे से कन्ध मिलाकर चलें। यदि हम आधी आबादी को क़ैद करके रखेंगे या ग़ुलाम बनाकर रखेंगे तो हम भी पूँजीवाद की बेड़ियों से आज़ाद नहीं हो पायेंगे। इसलिए मज़दूर स्त्रियों का फ़ैक्ट्री जाना मज़दूर वर्ग के लिए अच्छी बात है।
मज़दूर बिगुल, अप्रैल 2012













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