उद्धरण

उठो जागो, गाओ गान

उठाओ आँधी

खड़ा करो तू़फ़ान

नई सुबह की सुर्ख किरण में

झिलमिल कर लो प्राण

जोस दि दियागो

(प्वेर्तो रिको के क्रान्तिकारी कवि)

अगर हम नहीं लड़ते

अगर हम लड़ते नहीं जाते

तो दुश्मन

अपनी संगीनों से

हमें ख़त्म कर देगा

और फिर

हमारी हड्डियों की ओर

इशारा करके कहेगा

देखो,

ये गुलामों की हड्डियां हैं

गुलामों की!

 

मज़दूर बिगुल, अप्रैल 2011