आपस की बात
साथी दूधनाथ
लाल सलाम! कहीं से आपके सम्पादकीय नेतृत्व में आपके संगठन के द्वारा निकाले जाने वाला बिगुल पढ़ने का मौक़ा मिला। बहुत अच्छा लगा। मेरे पते पर बिगुल भेजने की कोशिश करेंगे। अगर सम्भव हो सके तो कॉ. लेनिन तथा कॉ. स्तालिन के नेतृत्व (1917 से 1953 तक) वाला रूसी संविधान (हिन्दी) भेजने की कोशिश करेंगे। साथी माओ त्से-तुङ के नेतृत्व में 1949 से 1978 तक चीनी (हिन्दी) संविधान की प्रति भेजने की कोशिश करेंगे। जो क़ीमत लगेगा, वह मनीऑर्डर द्वारा भेज दूँगा। मुझे पता चला है कि आप रूसी तथा चीनी साहित्य का हिन्दी रूपान्तर प्रकाशित करने की कोशिश में हैं।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि साथी लेनिन की पुस्तकें जो 54 भागों में छपी हैं। अगर धीरे-धीरे उनका हिन्दी रूपान्तर भी किया जाता, जो हिन्दी के मज़दूर वर्ग को मज़दूर वर्ग आन्दोलन तीव्र से तीव्रतर से तीव्रतम करने में प्रहरी का कार्य करेगा। बिगुल के प्रचार-प्रसार में भाग लेने वाले साथी क्रान्तिकारी अभिनन्दन।
आपका साथी – विजय कुमार सिंह
क्वार्टर बी III/74, पावर सप्लाई कॉलोनी
मूनीडीह, धनबाद, झारखण्ड
जब बहुसंख्यक श्रमिक जन हो श्रमरत
करें उत्पादन कि कम पड़े भण्डार घर
बदले में पाए श्रम का मोल इतना कमतर
कि बस जीवन चले घिसट-घिसट कर
और मालिक वर्ग क़ब्ज़ा जमाये उत्पादन पर
लगा मोहल बेचे ऊँचे दाम चढ़ाकर
मुनाफ़े की लूट मचाये दिन रात
पल प्रतिपल दिशा-देशान्तर
खड़ी कर ऊँची मीनारें
करे धन संचय अति भयंकर
कला-साहित्य, ज्ञान-विज्ञान का मालिक बनकर
धर्म के धुएँ की चादर फैलाकर
जब न्याय, इंसाफ़ क़ानून बन जाये
कुछ लोगों की मिलकियत
जब याचना की अर्जी
फ़ाइलों के तले दब जाये
जब ज़िन्दा रहने की शर्त
कमरतोड़ मेहनत के बराबर हो जाये
तब तुम्हारी उपस्थिति को किस तरह आँका जाये?
तुम्हारी चुप्पी का क्या अर्थ निकाला जाए
क्योंकि चुप रहने का भी मतलब होता है
तटस्थ होता कुछ भी नहीं
– गौरव, नोएडा
बिगुल, जून 2010













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