मज़दूरों की समस्या का समाधान नग वाली अँगूठी से नहीं बल्कि संघर्ष से होगा

रामसेवक, विशाल, लुधियाना

हम लोग सुन्दर नगर चौक लुधियाना में मज़दूर बिगुल का प्रचार कर रहे थे। वहाँ पर कार में से माइक लगाकर कहा जा रहा था कि नग वाली अँगूठी जो बाज़ार में 1500 रुपये में मिलती है वो हम 100 रुपये में दे रहे हैं। इससे अपनी परेशानियों से छुटकारा मिल जाता है। जैसे गृहक्लेश, शनि का ग्रह, मंगल का ग्रह, तुम पैसा कमाते हो पर बचता नहीं, मानसिक परेशानी। इन सब परेशानियों के लिए राशि के नग वाली अँगूठी पहनो, आप लोगों की परेशानियाँ दूर हो जायेगी।

आज विज्ञान से साबित कर दिया कि ग्रह क्यों और कैसे लगते हैं। धरती  सूरज की परिक्रमा लगाते हैं। धरती की परिक्रमा चाँद करता है। उसी परिक्रमा के बीच में कोई ग्रह सूरज की रोशनी रोक देता है तो पण्डित, पुरोहित, ओझा, सोखा लोगों को गुमराह बनाने लगते हैं। कहते हैं कि ग्रह शनि नाराज हो गया इसके लिए हवन कराओ और सत्रह प्रकार के सामान लाकर दो! पैसा कमाने वाली बात पर तो बस इतना ही कहेंगे कि मज़दूर तो बारह-चौदह घण्टे फैक्टरियों में काम करता है तब भी उसे उतना वेतन नहीं मिलता जिससे उसका और उसके घर का खर्च चल सके जितना वह कमाता है।

उसने फैक्टरी से तनख्वाह उठायी और राशन, लाला, कमरा मालिक, सब्जीवाला उसे तुरन्त ले लेता है। अगर वह उनकी नज़रों से ओझल होना चाहे तो नहीं होने देंगे। उसे तुरन्त पकड़ लेंगे। और उसकी जेब खाली करा लेंगे, इसी कारण उसकी मानसिक परेशानी बढ़ती है।

इन सबकी परेशानियों को दूर करने के लिए हमें मज़दूर-मेहनतकशों को एकजुट होकर अपने रोजगार, शिक्षा, आवास और हमारे अन्य अधिकारों के लिए भी संघर्ष करना होगा। नग वाली अँगूठी पहनने से हमारे जीवन और हालातों पर राई-रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ेगा। और हम सोचते-सोचते बूढ़े होकर मर जायेंगे।

मानव इतिहास बताता है कि दुनिया में हर चीज बदलती है। हर चीज में परिवर्तन होता है। लेकिन चीजों को बदलने के लिए विज्ञान के सहारे की जरूरत पड़ती है इसीलिए हमें विज्ञान को जानना होगा और समझना होगा और उस पर अमल करना होगा।

 

मज़दूर बिगुल, मार्च 2015


 

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