सलूजा धागा मिल में मशीन से कटकर एक मज़दूर की मौत
संदीप नैयर
लुधियाना की सलूजा धागा मिल में 14 फरवरी की रात को एक मज़दूर दिनेश रावत की मशीन से कटकर मौत हो गई। दिनेश रावत जो कि उत्तराखण्ड का रहने वाला था, इस कारखाने में पाँच साल से हेल्पर का काम कर रहा था। वह यहाँ पर धागा रोल करने वाली डायरेक्ट राफ्टिंग नाम की मशीन पर काम करता था। घटना वाली रात उसे काम पर दुबारा बुलाया गया था। वह दिन में सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक काम कर चुका था। जब उसे तीन बजे दुबारा बुलाया गया तब वह नींद वाली हालत में था। जिस मशीन पर वह काम करता था उसका सेफ्टी सेंसर खराब था। अगर धागा कट भी जाए तो सेफ्टी सेंसर से मशीन रुक जाती थी। मशीन का ऑपरेटर भी मौजूद नहीं था। मशीन की स्पीड भी बढ़ाई गई थी ताकि उत्पादन अधिक हो सके। इन हालात में दिनेश की मशीन में कटकर मौत हो गई।
इस कारखाने में काम करने वाले मज़दूरों से धक्के से ओवरटाइम काम करवाया जाता है और उन्हें साप्ताहिक छुट्टी भी नहीं दी जाती। मज़दूर थकावट और नींद वाली हालत में काम करने पर मजबूर होते हैं। अधिकतर मशीनों में सेफ्टी सेंसर भी काम नहीं करते। उत्पादन बढ़ाने के लिए मशीनों की स्पीड बढ़ा दी जाती है।
जिस दिन मैं इस घटना के बारे में मज़दूरों से बात करने गया तो मज़दूरों में लाचारी वाला माहौल था। चेतना न होने के चलते यह हालत बनीं हुई है। अगर मज़दूरों में मज़दूर वर्ग के अधिकारों, क्रान्तिकारी इतिहास, के बारे में जागृति फ़ैलाई जाए तो मज़दूर इस लाचार मानसिकता से बाहर निकल सकते हैं।
मज़दूर बिगुल, मार्च 2015














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