दिल्ली एनसीआर में जायज़ माँगों को लेकर जारी मज़दूर आन्दोलन को सही दिशा देने के वास्ते 𝐓𝐨 𝐭𝐚𝐤𝐞 𝐭𝐡𝐞 𝐨𝐧𝐠𝐨𝐢𝐧𝐠 𝐰𝐨𝐫𝐤𝐞𝐫𝐬’ 𝐦𝐨𝐯𝐞𝐦𝐞𝐧𝐭 𝐢𝐧 𝐃𝐞𝐥𝐡𝐢-𝐍𝐂𝐑 𝐢𝐧 𝐭𝐡𝐞 𝐜𝐨𝐫𝐫𝐞𝐜𝐭 𝐝𝐢𝐫𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧
हर जगह असंगठित मज़दूरों को अपनी यूनियनें संगठित करनी होंगी ताकि भविष्य में भी वे अपनी जायज़ माँगों को लेकर अनुशासित, व्यवस्थित व संगठित तौर पर संघर्ष कर सकें। मालिकान-प्रबन्धन व उनकी सरकारें आपसे ज़्यादा बड़ी नहीं हैं, बल्कि आपसे ज़्यादा संगठित हैं। आपका असंगठित होना ही उनके लिए सबसे बड़ा वरदान है। कारखाना मालिकों के संघ व संगठन होते हैं, जिसमें आपसी प्रतिस्पर्द्धा के बावजूद, मज़दूर वर्ग के विरुद्ध वे संगठित होते हैं। उनके ये संगठन और संघ ही मालिकान के हितों को सरकारों तक पहुँचाते हैं और चूँकि तमाम पार्टियों की सरकारें इसी मालिक वर्ग की मैनेजिंग कमेटी का काम करती हैं, इसलिए वे उनके हितों के अनुसार ही नीतियाँ बनाती हैं और कार्रवाई करती हैं। उनकी संगठित शक्ति द्वारा शोषण व उत्पीड़न का मुक़ाबला मज़दूर वर्ग केवल संगठित होकर ही कर सकता है। इसलिए आज ही समस्त असंगठित मज़दूरों को अपनी यूनियनों का गठन करने का प्रयास करना होगा। तभी हम अपने जायज़, क़ानूनी और संवैधानिक नागरिक व जनवादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर सकते हैं।























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