Category Archives: संघर्षरत जनता

दिल्‍ली एनसीआर में जायज़ माँगों को लेकर जारी मज़दूर आन्‍दोलन को सही दिशा देने के वास्‍ते 𝐓𝐨 𝐭𝐚𝐤𝐞 𝐭𝐡𝐞 𝐨𝐧𝐠𝐨𝐢𝐧𝐠 𝐰𝐨𝐫𝐤𝐞𝐫𝐬’ 𝐦𝐨𝐯𝐞𝐦𝐞𝐧𝐭 𝐢𝐧 𝐃𝐞𝐥𝐡𝐢-𝐍𝐂𝐑 𝐢𝐧 𝐭𝐡𝐞 𝐜𝐨𝐫𝐫𝐞𝐜𝐭 𝐝𝐢𝐫𝐞𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧

हर जगह असंगठित मज़दूरों को अपनी यूनियनें संगठित करनी होंगी ताकि भविष्‍य में भी वे अपनी जायज़ माँगों को लेकर अनुशासित, व्‍यवस्थित व संगठित तौर पर संघर्ष कर सकें। मालिकान-प्रबन्‍धन व उनकी सरकारें आपसे ज्‍़यादा बड़ी नहीं हैं, बल्कि आपसे ज्‍़यादा संगठित हैं। आपका असंगठित होना ही उनके लिए सबसे बड़ा वरदान है। कारखाना मालिकों के संघ व संगठन होते हैं, जिसमें आपसी प्रतिस्‍पर्द्धा के बावजूद, मज़दूर वर्ग के विरुद्ध वे संगठित होते हैं। उनके ये संगठन और संघ ही मालिकान के हितों को सरकारों तक पहुँचाते हैं और चूँकि तमाम पार्टियों की सरकारें इसी मालिक वर्ग की मैनेजिंग कमेटी का काम करती हैं, इसलिए वे उनके हितों के अनुसार ही नीतियाँ बनाती हैं और कार्रवाई करती हैं। उनकी संगठित शक्ति द्वारा शोषण व उत्‍पीड़न का मुक़ाबला मज़दूर वर्ग केवल संगठ‍ित होकर ही कर सकता है। इसलिए आज ही समस्‍त असंगठित मज़दूरों को अपनी यूनियनों का गठन करने का प्रयास करना होगा। तभी हम अपने जायज़, क़ानूनी और संवैधानिक नागरिक व जनवादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर सकते हैं।

Protest in Visakhapatnam opposing the arrest of Mazdoor Bigul activists

The police targeted Mazdoor Bigul activists who have been active in the strike, and forcibly picked them up from a metro station on Saturday evening while they were returning from the protest. Three women activists were detained without the presence of women police officers. Since last night, other activists have been waiting at the police station and demanding information, but the police haven’t given a shred of informationa—neither have they revealed their whereabouts nor have they released them.

गुड़गांव- मानेसर में उठी वेतन बढ़ोतरी और मज़दूरों के जायज़ हक-अधिकारों की लड़ाई अब पूरे गुड़गांव, बिनौला, धारूहेड़ा और बावल सहित ऑटोमोबाइल और एक्सपोर्ट क्षेत्रों में फैल रही है। मज़दूरों की मांगें पूरी तरह जायज़ हैं—न्यायपूर्ण वेतन, बेहतर कार्य-परिस्थितियाँ और ठेका प्रथा का अंत। बिगुल मज़दूर दस्ता की अपील है कि गुरुग्राम, दिल्ली और पूरे एनसीआर के मज़दूर एक साझा मांग-पत्र तैयार करें और तालमेल कमेटी बनाकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाएँ।

गुड़गांव- मानेसर में उठी वेतन बढ़ोतरी और मज़दूरों के जायज़ हक-अधिकारों की लड़ाई अब पूरे गुड़गांव, बिनौला, धारूहेड़ा और बावल सहित ऑटोमोबाइल और एक्सपोर्ट क्षेत्रों में फैल रही है। मज़दूरों…

कोटद्वार (उत्तराखण्ड) में संघी उत्पात और फ़ासिस्ट साम्प्रदायिक राजनीति का कारगर प्रतिरोध

फ़ासिस्ट संघ परिवार की साम्प्रदायिक साज़िश की पोल-पट्टी खोलते ही ‘हिन्दू’ ‘हिन्दू’ नहीं रह जाता। वह “ग़द्दार” हो जाता है और हिन्दू धर्म के झण्डाबरदारों द्वारा उसकी हत्या की सुपारी बाँटी जाने लगती है। यानी या तो आप फ़ासिस्टों के हर झूठ, नफ़रत की राजनीति में उनका साथ दीजिए या चुप रहिए! अगर आप इनकी असलियत को उजागर करेंगे तो आपको ‘हिन्दू’ से ‘ग़द्दार’ होने में सेकण्ड भी नहीं लगेंगे! दीपक के साथ भी यही हुआ। दीपक ने बजरंग दल की गुण्डागर्दी पर ज्यों ही उँगली उठायी  (जो कि हर इंसाफ़पसन्द इन्सान का फ़र्ज़ है!) वैसे ही दीपक के नाम सुपारी दी जाने लगी। ग़ौरतलब है कि ‘हिन्दू रक्षा दल’ के अध्यक्ष ललित शर्मा ने दीपक का सिर कलम कर लाने वाले को 5 लाख 51 हज़ार रुपये का इनाम देने का ऐलान किया।

मोदी सरकार द्वारा लाये गये चार लेबर कोड और वीबी-ग्रामजी क़ानून के ख़िलाफ़ चलाये जा रहे अभियान को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन!

केन्द्रीय ट्रेड यूनियन फ़ेडरेशनों को और ग़रीब किसानों और ग्रामीण मज़दूरों की नुमाइन्दगी का दावा करने वाले यूनियनों व सगठनों को ऐसी आम हड़ताल का आह्वान करना चाहिए। व्यापक मज़दूर-मेहनतकश आबादी को इन संगठनों व यूनियनों पर ऐसी आम हड़ताल का ऐलान करने का दबाव बनाना चाहिए। हम एक बार फिर से केन्द्रीय ट्रेड यनिूयन फ़ेडरेशनों के नेतृत्व से दिली अपील करते हैं कि वे वक़्त की नज़ाकत और ज़रूरत को समझें। इस देश के मज़दूर वर्ग पर इससे बड़ा और कोई हमला नहीं हो सकता है और मोदी-शाह सरकार किसी भी तरह के रस्मी कवायद, ज़ुबानी जमाख़र्च, प्रतीकात्मक प्रदर्शन आदि करने से सुनने वाली नहीं है। उसे झुकाने के लिए आज अपने सबसे बड़े हथियारों में से एक यानी आम हड़ताल का इस्तेमाल करना ही होगा। इस वक़्त अगर केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें अनिश्चितकालीन आम हड़ताल की तरफ़ आगे बढ़ती हैं तो हम यह बात बिल्कुल दावे के साथ कह सकते हैं कि अन्य यूनियनें व संगठन भी उनका भरपूर साथ देंगे।

पानीपत रिफ़ाइनरी के मज़दूरों की सभी जायज़ माँगों को पूरा करो!

काम करने के हालात बेहद अमानवीय हैं। मज़दूरों को पीने का साफ़ पानी, शौचालय, परिवहन, कैण्टीन और पर्याप्त सुरक्षा उपकरण जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी ठीक से नहीं मिलती हैं। रिफ़ाइनरी जैसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण कार्यस्थल पर इन अमानवीय हालात में मज़दूरों से काम लिया जाना सीधे तौर पर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है।

अंकिता हत्याकाण्ड : न्याय के लिए एक बार फ़िर हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे मगर भाजपा बेशर्मी से ‘वीआईपी’ को बचाने में जुटी!

ये कोई पहला मामला नहीं है जब भाजपा और संघ ने बलात्कारियों-अपराधियों को बचाने में, उनको संरक्षण देने में एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाया हो! इतना ही नहीं इस “संस्कारी पार्टी” में बलात्कारियों-अपराधियों के स्वागत की एक नई परम्परा ही शुरू कर दी गई है। अभी कुलदीप सिंह सेंगर के जमानत के शर्मनाक फ़ैसले आने के बाद ये लोग फूल-माला लेकर ‘बलात्कारी स्वागत’ हेतु पहुँच गये थे। यह अलग बात है कि जन दबाव के चलते सुप्रीम कोर्ट को ये फ़ैसला रद्द करना पड़ा। कठुआ में आठ साल की बच्ची के बलात्कारियों के समर्थन में भाजपाइयों ने तिरंगा रैली निकाली थी। बिलकिस बानो के बलात्कारियों की रिहाई के बाद भाजपा नेताओं द्वारा अच्छे “संस्कारी ब्राह्मण” होने के लिए बलात्कारियों का फूल-माला से स्वागत किया गया था। आई.आई.टी बी.एच.यू के गैंगरेप के आरोपी की ज़मानत होने पर केक काटकर स्वागत किया गया था।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र आन्दोलन को मिली शानदार जीत के मायने

फ़ासीवादी मोदी सरकार के सत्तासीन होने के बाद से ही देशभर में लोकतान्त्रिक आवाज़ों और जनवादी स्पेस का गला घोंटा जा रहा है। देश की सभी संस्थाओं में ऊपर से नीचे तक फ़ासीवादी जकड़बन्दी लगातार मज़बूत होती जा रही है। भाजपा सरकार द्वारा मेहनतकश जनता पर हमले का दौर बदस्तूर जारी है। चार लेबर कोड मेहनतकशों पर अब तक का सबसे बड़ा फ़ासीवादी हमला है। इसी तरह कुछ साल पहले मोदी सरकार द्वारा लागू ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ मेहनतकश अवाम के घरों के बच्चों पर एक बड़ा हमला था। जैसे-जैसे नयी शिक्षा नीति पर अमल हो रहा है, वैसे-वैसे उसकी सच्चाई भी आम जनता के सामने खुलती जा रही है। विश्वविद्यालयों में बेतहाशा फ़ीस वृद्धि हो रही है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पिछले चार सालों में नियमित कोर्स के लिए छः गुना से ज़्यादा फ़ीस बढ़ायी जा चुकी है और हर साल 10 फ़ीसदी की फ़ीस वृद्धि की जा रही है।