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जॉन रीड : कम्युनिज्‍़म के लक्ष्य को समर्पित बुद्धिजीवी

अक्‍टूबर क्रान्ति ने रीड के जीवन पर अमिट छाप छोड़ी। अमेरिका वापस लौटने पर रीड पूरी तरह से समाजवाद के प्रचार-प्रसार में जुट गये। इसी उद्देश्य से 1919 में बनी ‘कम्युनिस्ट लेबर पार्टी’ की स्थापना में रीड ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। 1919 के बाद लिखे गये तमाम लेखों में रीड ने सर्वहारा अधिनायकत्व की पुरज़ोर वक़ालत और हिफ़ाज़त की। लेकिन रीड अपने इन प्रयासों को और आगे बढ़ाते, इससे पहले ही 17 अक्‍टूबर 1920 को टाइफ़स बुख़ार के कारण उनकी मृत्यु हो गयी। अत्यधिक परिश्रम के कारण पहले ही उनका शरीर काफ़ी कमज़ोर हो चुका था। मृत्यु के बाद रीड को मास्को के लाल चौक में क्रेमलिन की दीवार के साये में दफ़नाया गया। रीड इस सम्मान के सर्वथा योग्य थे। वे केवल एक जनपक्षधर पत्रकार नहीं थे। वे एक कम्युनिस्ट क्रान्तिकारी कार्यकर्ता थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाजवाद के लक्ष्य को समर्पित किया।