एकदिनी रस्मी हड़तालों से न कुछ हासिल हुआ है न हासिल होगा!
कोई भी मज़दूर साथी इस बात को सहज ही समझ सकता है। हड़ताल मज़दूर वर्ग के सबसे अहम हथियारों में से एक है। हड़ताल का मक़सद होता है मुनाफ़े का चक्का रोककर पूँजीपति वर्ग को अपनी माँगों पर झुकने के लिए मजबूर किया जाय। इसका मक़सद एकदिनी रोष-प्रदर्शन नहीं होता है। हड़ताल के इस बेहद अहम हथियार को पिछले तीन दशकों से जारी सालाना रस्मअदायगी वाली “हड़तालों” ने बेअसर कर दिया है। पूँजीपति वर्ग मज़दूर वर्ग पर निर्भर करता है। बिना उत्पादन के कोई मूल्य नहीं पैदा होता, कोई समृद्धि नहीं पैदा होती इसलिए कोई बेशी-मूल्य या मुनाफ़ा भी नहीं पैदा होता। और पूँजीपति को केवल एक ही बात से फ़र्क पड़ता है: मुनाफ़ा।
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