सत्यम ऑटो कम्पोनेण्ट के 1000 से अधिक मज़दूर भूख हड़ताल पर!

हरियाणा के मानेसर औद्योगिक क्षेत्र की सत्यम ऑटो कम्पोनेण्ट कम्पनी में पिछली 1 मार्च से एक हज़ार से अधिक स्थायी और कैज़ुअल दोनों मज़दूर पूरी तरह काम बन्द करके कम्पनी के भीतर ही अपने बुनियादी श्रमिक अधिकारों, ओवर टाइम, वेतन बढ़ोत्तरी, बोनस आदि माँगों को लेकर हड़ताल पर बैठने को मजबूर हुए हैं। मज़दूर अपनी माँगों को लेकर एक सप्ताह तक दोपहर के भोजन का बहिष्कार कर चुके हैं, लेकिन प्रबन्धन द्वारा उनकी माँगों की तरफ़ कोई ध्यान न दिये जाने के कारण वे उत्पादन पूरी तरह से ठप्प करने को मजबूर हुए हैं।
सत्यम कम्पनी में क़रीब 1400-1500 कैज़ुअल और करीब 426 परमानेण्ट मज़दूर काम करते हैं। ये मज़दूर मुख्यतः कोरोना की आड़ में कम्पनी प्रबन्धन द्वारा उनसे उनके मौलिक अधिकार छीने जाने और वेतन अदायगी न किये जाने, बोनस-भत्ते में कटौती, वेतन बढ़ोत्तरी की माँगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहें हैं और दो साल से लम्बित अपनी वेतन समझौते की माँगों तथा कम्पनी प्रबन्धन द्वारा किये गये वायदों को लागू करवाने के लिए संघर्ष को तेज़ करने के लिए मजबूर हुए हैं।
ज्ञात रहे कि मानेसर के सेण्टर 3 (प्लॉट नम्बर 26 सी) स्थित इस प्लाण्ट में हीरो, होण्डा के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के वाहनों के कलपुर्जे बनते हैं। भारत में सत्यम कम्पनी के कुल छह प्लाण्ट हैं, जो हरियाणा में मानेसर के अलावा धारूहेड़ा (ज़िला रेवाड़ी), लुधियाना (पंजाब), होली (गुजरात), चेन्नई (तमिलनाडू), हरिद्वार (उत्तराखण्ड) में स्थित हैं।
लॉकडाउन के बाद 5 मई से मज़दूर काम पर लौटे, लेकिन कैज़ुअल मज़दूरों को लॉकडाउन का पैसा नहीं दिया गया, उल्टा प्रबन्धन मज़दूरों से ज़बरन 12-12 घण्टे की शिफ़्ट करवायी जा रही है और भुगतान भी डबल रेट से नहीं किया जा रहा है। कम्पनी छुट्टियों में कटौती कर रही है। बोनस व अटेण्डेन्स अवार्ड में कटौती कर रही है। टायलेट जाने पर भी रोकटोक कर रही है और थोड़ा भी बोलने पर बाहर का रास्ता दिखा रही है।
कम्पनी स्थायी मज़दूरों के साथ 2019 से लम्बित त्रि-वर्षीय वेतन समझौता (वेज सेटलमेण्ट) नहीं कर रही है। कम्पनी प्रबन्धन मज़दूरों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बात करने की बजाय मज़दूरों पर आरोपपत्र जारी कर रहा है, श्रम विभाग के समक्ष बात करने की बजाय चण्डीगढ़ में शिकायत दर्ज करवा रहा है। आवाज़ उठाने वाले मज़दूरों को आरोप पत्र भेजा जा रहा है। कम्पनी से निकालने की धमकी दी जा रही है। लाइनों पर परेशान किया जा रहा है।
मज़दूरों द्वारा सभी यूनियनों व इन्साफ़पसन्द नागरिकों से मदद की अपील की जा रही है। श्रम विभाग व प्रशासन से न्याय की गुहार लगायी जा रही है।

मज़दूर बिगुल, मार्च 2021


 

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