वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में काम के बुरे हालात
– विष्णु
मैं वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में गरम रोला के कारख़ाने में काम करता हूँ। काम के हालात पहले से बुरे हो चुके हैं। एक तरफ मालिक मज़दूरों को काम से निकलता है और दूसरी तरफ कम मज़दूरों से ज़्यादा काम करवाता है। हमें साफ दिखता है कि मालिक हमें लूट कर अपनी तिज़ोरी भर रहा है और हम धीरे-धीरे अन्दर से सिकुड़ते जा रहे हैं। पहले जब मैं काम करने आया था तो शरीर हष्ट-पुष्ट था, अब स्टील लाइन में काम करते हुए कई तरह की बीमारियाँ हो गई हैं। डॉक्टर ने स्टील लाइन में काम करने से मना किया है पर अब नया काम मिलना भी मुश्किल है। ऊपर से ठेकेदारी प्रथा लगातार बढ़ती जा रही है। ज़्यादातर फ़ैक्ट्री में अब मालिक ठेके पर ही काम करवाते हैं ताकि उन्हें कोई नियम क़ानून लागू न करना पड़े। सुबह उठो, काम पर जाओ, 12 घण्टे खटो फिर घर आकर खाना बनाओ और सो जाओ, यही ज़िन्दगी बन गयी है। मालिक की लूट को सभी सरकारें भी समर्थन करती हैं। कई बार लगता है कि इससे निकलने का कोई रास्ता नहीं है।
पर ‘मज़दूर बिगुल’ अख़बार को पढ़ कर लगता है कि यह सब बदला जा सकता है, मालिकों की यह लूट हमेशा जारी नहीं रह सकती। मज़दूर आन्दोलन के इतिहास को जानने वर्तमान को समझने के लिए और अपनी मुक्ति का रास्ता जानने के लिए मैं नियमित मज़दूर बिगुल पढ़ता हूँ और अन्य मज़दूरों को भी इसके बारे में बताता हूँ।
मज़दूर बिगुल, जून 2022













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