केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की बेटी द्वारा अवैध रूप से शराबख़ाना चलाने का मामला
झूठ-फ़रेब, घोटाले, भ्रष्टाचार और मक्कारी, है भाजपाइयों-संघियों की जन्मजात बीमारी!

आशीष

देश में एक ओर नौजवानों की भारी आबादी बेकारी-बेरोज़गारी के धक्के खाने को मजबूर है और दूसरी ओर नेताओं के बाल-बच्चे मलाई चाट रहे हैं। मोदी सरकार में महिला एवं बाल विकास विभाग की कैबिनेट मंत्री स्मृति ईरानी की बेटी ज़ोइश ईरानी द्वारा गोवा के असगाओ में संचालित ‘सिली सोल्स कैफ़े एण्ड बार’ नामक एक रेस्टोरेण्ट में अवैध तरीक़े से शराबख़ाना चलाये जाने का मामला सामने आया है। एक शिकायतकर्ता के द्वारा मामला उठाये जाने के बाद इस रेस्तरां के ऊपर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इस मामले में कई सारे गम्भीर आरोप लगे हैं। शराब के लाइसेंस को पाने के लिए झूठे एवं ग़ैर-क़ानूनी दस्तावेज़ पेश किये गये हैं। जून 2022 में शराब का लाइसेंस लेने के लिए एन्थनी डीगामा नामक एक व्यक्ति के नाम से आवेदन किया गया जबकि मई 2021 में ही इस आदमी की मौत हो चुकी है। इसके साथ यह कहा जा रहा है कि गोवा में बार के लिए किसी रेस्टोरेण्ट को केवल एक लाइसेंस दिया जा सकता है जबकि यहाँ दो लाइसेंस दिये गये हैं। इसके साथ ही यह आरोप भी है कि यह रेस्टोरेण्ट रजिस्टर्ड नहीं है।
इस भ्रष्टाचार की कलई खुलने के बाद स्मृति ईरानी खुलकर अपनी बेटी के बचाव में तथ्यों को झूठलाने और दबाने का भरपूर प्रयास कर रही हैं। सत्ता की ताक़त के बावजूद स्मृति ईरानी के लिए तथ्यों से मुँह फेर पाना आसान नहीं है। उनकी पूरी कोशिश हास्यास्पद और नौटंकी ही प्रतीत होती है। एक ख़बर के मुताबिक़ इसी साल के अप्रैल महीने में स्मृति ईरानी रेस्टोरेण्ट के लिए अपनी बेटी की प्रशंसा में इतना तक बोल चुकी हैं कि अपनी बेटी की माँ होने पर उसे गर्व है। अब मामला प्रकाश में आने के बाद केन्द्रीय मंत्री अपनी बेटी को विदेश के एक विश्वविद्यालय की छात्रा बता रही हैं तथा रेस्टोरेण्ट चलाने की बात को नकार रही हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इस प्रकार की सच्चाइयों के ज़रिए बीजेपी नेताओं के दोमुँहे चरित्र को सहज ही समझा जा सकता है। सरकारी चाकर बन चुके हाई कोर्ट से ईरानी ने अपने पक्ष में फ़ैसला करवा लिया लेकिन अंग्रेज़ी अख़बार इण्डियन एक्सप्रेस ने 3 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में ख़ुलासा किया है कि किस तरह मंत्री ईरानी और उनका परिवार बेनामी ढंग से इस रेस्टोरेण्ट और अन्य सम्पत्तियों का असली मालिक है।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर बीजेपी द्वारा परिवारवाद की राजनीति पर विपक्षी बुर्जुआ चुनावबाज़ पार्टियों पर ज़ुबानी पैंतरेबाज़ी का ज़ोर आज़माते रहने की हक़ीक़त का पर्दाफ़ाश कर दिया है। जो लोग अभी भी आँखें बन्द किये हुए हैं वह भी आँखें खोलकर देखें तो सच्चाई नग्न आँखों से आपको सीधे दिख जायेगी। आम मेहनतकश मज़दूर व निम्न मध्यम वर्ग से आने वाले परिवारों के बच्चों के लिए आरएसएस-भाजपा के नेताओं ने साम्प्रदायिकता, नफ़रत, उन्माद आदि के साथ-साथ बेकारी-बेरोज़गारी का प्रबन्ध किया है तो वही अपने बच्चों के लिए क़ानूनी और ग़ैर-क़ानूनी सभी प्रकार के रास्तों से पद-प्रतिष्ठा, विदेशों में शिक्षा-दीक्षा तथा तमाम क़िस्म की सुख-सुविधाओं का इन्तज़ाम किया है। देश में एक बड़ी आबादी है जो स्कूली शिक्षा ग्रहण करने के बाद कॉलेज, विश्वविद्यालय की दहलीज तक नहीं पहुँच पाती लेकिन जेपी नड्डा से शिवराज सिंह चौहान के बच्चे विदेशों में आराम से पढ़ाई कर रहे हैं। यहाँ सालों तक पढ़ाई-लिखाई करने के बावजूद नौजवानों का कोई भविष्य नहीं होता, वहीं देश के गृहमंत्री का बेटा जय शाह भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) का सचिव है। भाजपा के पूर्व नेता वर्तमान उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का बेटा हर्षवर्धन नायडू एक मोटर कम्पनी का बहुत बड़ा डीलर है। सरकार और हर्षवर्धन नायडू के बीच अनुबन्ध में भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके हैं। राजनाथ सिंह समेत कई ऐसे नेता हैं जिनके बेटे-बेटियाँ विधायक-सांसद बने बैठे हैं। राजनाथ सिंह का बेटा पंकज सिंह उत्तर प्रदेश में विधानसभा का सदस्य है। परिवारवाद के मामले में बीजेपी किसी भी दूसरी बुर्जुआ पार्टी से कहीं भी पीछे नहीं है चाहे ज़ुबानी तौर पर बीजेपी के नेता जितना चीख़-पुकार मचा लें परन्तु वास्तविकता तो यही है।
ज़ोइश ईरानी के रेस्टोरेण्ट के मामले में कथित तौर पर उस रेस्टोरेण्ट का मेनू सामने आया है जिसमें यह बात खुलकर सामने आ रही है कि वहाँ पर गौमांस, बीफ़ और सुअर का मांस भी परोसा जाता है। भाजपा के लोग गाय को माता बताते हैं और इनके समर्थकों ने गौ हत्या के नाम पर अनेकों जगहों पर भीड़ द्वारा इन्सानों की हत्या (मॉब लिंचिंग) तक को अंजाम दिया है। गाय के नाम पर बीजेपी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का काम करती है जबकि वास्तविकता यही है कि अपने मुनाफ़े के लिए गौमांस परोसने में भी इनके नेताओं को कोई गुरेज़ नहीं है।
वैसे तो आमतौर पर सभी पूँजीवादी चुनावबाज़ पार्टियों के नेता-मंत्री सत्ता में बैठकर अपनी तिजोरियाँ भरते ही हैं और अपने परिवार को स्वर्ग-सा जीवन देते हैं। पर इसमें भाजपा एक क़दम और आगे है। ये संघी-भाजपाई एक तरफ़ अपने और अपने आक़ाओं के लिए जनता की अकूत सम्पत्ति लूट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ आम घरों के नौजवानों को शिक्षा-रोज़गार देने के बजाय ये उन्हें दंगाई बनाना चाहते हैं। ये चाहते हैं कि आज के नौजवान इनके ख़िलाफ़ लड़ने के बजाय आपस में ही लड़ते रहें। तभी दिल्ली दंगे हों या जहाँगीरपुरी में हुए दंगे हों, इनकी कोशिश मस्तिष्क-मृत युवाओं की एक नस्ल तैयार करने की है जो सिर्फ़ इनके इशारे पर चलें, अपने हक़-अधिकार, शिक्षा-रोज़गार न माँगें और इनके कहने पर क़त्लेआम मचा दें। वहीं अपने बच्चों को ये दुनिया के सारे ऐशोआराम मुहैया कराते हैं। यही है इन भाजपाइयों, संघियों का असल चरित्र।

मज़दूर बिगुल, अगस्त 2022


 

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