सभी साथी एकजुट होकर संघर्ष करें, संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता!

 आइसिन कम्पनी में कार्यरत आपका एक मज़दूर साथी

साथियो, मैं आइसिन ऑटोमोटिव हरियाणा प्राइवेट लिमिटेड रोहतक का एक मज़दूर हूँ। इस कम्पनी में लगभग 700 मज़दूर साथी कार्य करते हैं। हमारे सारे मज़दूर साथियों के साथ इस जापानी कम्पनी की मैनेजमेंट ने जो जुल्म किये उसके बारे में मैं आज सारे साथियों और मज़दूर भाइयों से कुछ बात बोलना चाहता हूँ।

पिछली 3 मई को कम्पनी वालों ने हमारे 20 साथियों को बिना गलती के बाहर निकल दिया। कम्पनी वालों ने बोला कि इन 20 मज़दूरों को छोड़ कर बाकी सभी ‘अण्डरटेकिंग’ पर हस्ताक्षर करके अन्दर जा सकते सकते हो। उस फॉर्म में लिखा था कि मज़दूर कम्पनी में कुछ भी माँग नहीं रखेंगे, उसके बाद ही अंदर जाने की अनुमति मिलेगी। हमें बहुत दुःख हुआ कि जिस कम्पनी को हम सब इतनी मेहनत करके इतना ऊपर तक लाये आज वही कम्पनी कह रही है कि हम कोई माँग नहीं कर सकते। हमने कहा कि पहले इन 20 बन्दों को काम पर वापस लो फिर उनकी जाँच की जाये, अगर उनकी कोई गलती मिलती है तो आप निकाल सकते हैं लेकिन कम्पनी वालों ने हमारी बात नहीं सुनी। तो हमारी यूनियन के साथी अनिल, जसवीर, विकास, गोपाल, कैलाश, रणजीत और उमेश डी.सी. रोहतक व लेबर कोर्ट के पास गये और हमारी समस्याएँ बतायी लेकिन उन्होंने मदद करने से साफ़-साफ़ मना कर दिया। वे सब कम्पनी की भाषा बोले, उन्होंने ये भी कहा कि अण्डरटेकिंग पर हस्ताक्षर ना करके मज़दूरों ने गलत किया है। हमारे साथियों ने कहा कि हम सभी काम करना चाहते हैं और सभी अन्दर जाने को तैयार हैं लेकिन हम सभी 20 साथियों सहित साथ जायेंगे और ‘ग़ैरकानूनी अण्डरटेकिंग फॉर्म’ पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।

29 दिन के संघर्ष के बाद भी प्रशासन या कम्पनी किसी प्रकार के समझौते पर राजी नहीं हुए। हमारे साथी कई बार लेबर कोर्ट में गये और डी.सी. रोहतक से मिले लेकिन सबने साफ़-साफ़ मना कर दिया कि वे समझौता नहीं करा सकते। 31 मई को जो जुल्म हमारे साथियों के साथ हुआ वह जुल्म किसी के भी साथ ना हो! जब हमने देखा कि कोई समझौता नहीं हो रहा तो हमारे साथी मजबूर होकर गेट के सामने बैठ गए लेकिन कम्पनी वालों ने प्रशासन को बुला लिया और पूरी फ़ोर्स लगा दी। मज़दूर साथी 29 दिन तक बैठे रहे लेकिन कोई पूछने तक नहीं आया और उस दिन कम्पनी के बुलाने पर प्रशासन ने गाड़ियाँ भर-भर के पुलिस वाले भेज दिये और लाठी चार्ज करवा दिया। ये देख कर हमारा तो प्रशासन से भरोसा ही उठ गया। 31 मई को प्रशासन ने पूरी ताकत के साथ हमारे मज़दूर साथियों पर लाठी चार्ज करवाया। हमारे 425 साथियों को जेल में भी डाल दिया जिनमे मज़दूर महिला साथी भी थी और विभिन्न संगठनों के कुछ कार्यकर्त्ता भी। निर्दोषों को जेल में ले जाते प्रशासन को ज़रा भी शर्म नहीं आई। ये प्रशासन पूँजीपतियों की बात करता है और पूँजीपतियों का ही साथ देता है। हमारे प्रधान जसवीर हुड्डा को सलाम जिनकी पत्नी और बहन तक हमारे साथ जेल में थे। और भी कई साथियों के घर वालों ने हमारा सहयोग दिया। कम्पनी वालों ने सोचा था इससे हमारी एकता टूट जायेगी पर ऐसा हुआ नहीं हमारी एकता घटने की बजाय और भी बढ़ गयी।

कम्पनी में हमारे मज़दूर साथियों का बहुत शोषण होता रहा है। ऐसे ही हालात में लोग आत्महत्याओं के लिए मजबूर होते हैं। हमने निर्णय लिया था कि हम यूनियन के रजिस्ट्रेशन के लिए फ़ाइल लगायेंगे। जब लेबर कोर्ट से फ़ाइल ‘ओके’ होकर कम्पनी आयी तो उस समय हमारे 270 के क़रीब मज़दूर साथी स्थायी थे। कम्पनी ने चाल चलनी शुरू कर दी। जब वेरिफिकेशन हुआ तब हमारी फाइल पूरी तरह से ठीक थी लेकिन कम्पनी वालों ने हमारी यूनियन फाइल खारिज कराने में पूरी ताकत लगा दी। उन्होंने लेबर कोर्ट में इतना पैसा खिला दिया कि लेबर कोर्ट ने कम्पनी मैनेजमेंट की बात बोली। अब किस पर भरोसा करोगे? लेबर कोर्ट कहने के लिए मज़दूरों के लिए होता है लेकिन उन्होंने 700 मजदूरों की रोजी रोटी छीनने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कम्पनी वालों ने 525 मजदूरों को परमानेंट दिखा दिया और फ़ाइल रिजेक्ट करा दी। कम्पनी मैनेजमेंट और श्रम विभाग ने हमारे यूनियन नम्बर को रोक दिया गया और षड्यन्त्र करके हमारी पंजीकरण फ़ाइल रद्द करा दी।

कम्पनी को काम करते 5 साल हो गये लेकिन किसी भी मज़दूर की सैलरी 8,600 रुपये से बढ़कर 12,000 रुपये नहीं हुई है, इक्के दुक्के किसी की तनख्वाह बढ़ी भी है तो थोड़ी बहुत जबकि हमारे साथ ही ज्वाइन किये मैनेजमेंट स्टाफ की सैलरी 15,000 से बढ़कर 1,50,000 तक हो गयी है। जब सैलरी बढ़ाने की बात आती है तो कम्पनी वाले कहते हैं कि कम्पनी घाटे में चल रही है। जबकि जापानी कम्पनी नये मॉडल हेतु उत्पादन करने के लिए लाइन लगा कर भर्ती कर रही है। इससे पता चलता है कम्पनी वाले और सारे प्रशासन वाले मिले हुए हैं। मोदी जी विदेशी कम्पनी लाकर बोलते हैं कि मैं भारत की गरीबी हटाउँगा लेकिन कम्पनियों के व्यवहार से लगता है जैसे यहाँ पर उन्हीं की तानाशाही चलती है बाकी सभी उनके सामने पूँछ हिलाते हैं।

मज़दूर भाइयो! अगर हम एकजुट नहीं हुए तो ये कम्पनियाँ प्रशासन के साथ मिलीभगत करके यूँ ही हमारा शोषण करती रहेंगी। सभी साथियों से मेरी प्रार्थना है कि एकजुट हो जाओ। अगर हम ऐसा नहीं करेंगे तो मज़दूर का और अधिक शोषण होगा। सभी साथियों से प्रार्थना है कि सभी साथी एकजुट होकर संघर्ष करें, संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता।

 

मज़दूर बिगुल,सितम्‍बर 2017


 

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