हरियाणा में क्लर्क भर्ती ने खोली राज्य में बेरोज़गारी की पोल!
दर-दर की ठोकरें खा रहे युवा और उनके हितों का सौदा कर रहे चुनावी मदारी!

हरियाणा चयन आयोग के द्वारा निकाली गयी क्लर्क के 4,858 पदों की भर्ती के लिए 15 लाख से ज्‍़यादा छात्र-युवाओं ने आवेदन किया था। इस हिसाब से नौकरी आवेदन करने वाले 309 युवाओं में से मात्र एक को ही मिलेगी! अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के लिए 200 से लेकर 300 किलोमीटर तक का सफ़र तय करना पड़ा और परिवहन की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं थी। युवाओं को एक अदद नौकरी के लिए अपना जीवन जोखिम में डालना पड़ता है जिसके चलते इसी भर्ती की जद्दोजहद में क़रीब 18 युवा अपने जीवन से ही हाथ धो बैठे। पहले की भर्तियों में भी बेरोज़गार युवाओं को ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ता था परन्तु सरकार ने उन घटनाओं से कोई सीख नहीं ली। परीक्षा केन्द्र नज़दीक भी दिये जा सकते थे। जिससे छात्रों का समय और पैसा दोनों बच सकते हैं। जिन छात्रों का अगले दिन सुबह पेपर होता है उन्हें पहले दिन ही निकलना पड़ता है और ठहरने के लिए धक्के खाने पड़ते हैं। क्या धक्के खा रहे युवा किसी नेता-मंत्री के बेटा-बेटी हैं? नहीं! क्या ये किसी अफ़सर-ठेकेदार-बिल्डर की सन्तान हैं? नहीं! इनमें से ज़्यादातर प्रदेश के ग़रीब मज़दूर-किसान और छोटे-मोटे काम-धन्धा करने वालों की औलादें हैं। फिर भला सरकार क्यों बोझ ले? खट्टर एण्ड मण्डली को इससे क्या, चाहे कोई जिये या मरे।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआरई) के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार हरियाणा में बेरोज़गारी की दर 28.7% है जो कि देश के किसी भी राज्य में सबसे ज्‍़यादा और राष्ट्रीय बेरोज़गारी दर (8.4%) की लगभग तीन गुनी है। रोज़गार की इतनी बुरी हालत होने के बावजूद हरियाणा की खट्टर सरकार बड़ी ही बेशर्मी के साथ अपनी पीठ थपथपा रही थी कि उसने हरियाणा के नौजवानों को रोज़गार दिये हैं! जबकि आँकड़े चीख़-चीख़कर कह रहे हैं कि रोज़गार पर इतना बड़ा संकट आज से पहले कभी नहीं आया था।

भाजपा ने 2014 के चुनाव से पहले नौकरियाँ देने के बारे में लम्बी-चौड़ी डींगें हाँकी थीं किन्तु अन्त में जाकर चन्द हज़ार पदों पर कुछ ही भर्तियाँ पूरी हुई थीं। रोड़वेज़, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे मूलभूत विभागों में ही लाखों-लाख पद अभी तक भी ख़ाली पड़े हैं। विभिन्न विभागों और महक़मों के कर्मचारियों को पक्का करने का वायदा भी भाजपा ने नहीं निभाया। प्रदेश के पढ़े-लिखे लाखों युवा बेबस हैं और छोटी-मोटी नौकरियों के पीछे दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। असल में हरियाणा भाजपा को जनता के काम करने में कम और जातिवाद की राजनीति तथा झूठ बोलने के कौशल पर अधिक भरोसा है! हरियाणा में 1995-96 में 4,25,462 सरकारी-अर्ध सरकारी नौकरियाँ थीं जोकि 20 साल बाद घटकर मात्र 3,66,829 रह गयीं। यानी प्रदेश की तमाम सरकारें हर साल औसतन 3,100 नौकरियाँ खा गयी हैं!

देश के संविधान का अनुच्छेद 14 कहता है कि सभी को ‘समान नागरिक अधिकार’ हैं और अनुच्छेद 21 के अनुसार सभी को ‘मानवीय गरिमा के साथ जीने का अधिकार’ है। किन्तु ये अधिकार देश की बहुत बड़ी आबादी के असल जीवन से कोसों दूर हैं। क्योंकि न तो देश स्तर पर एक समान शिक्षा-व्यवस्था लागू है तथा न ही सभी को पक्के रोज़गार की कोई गारण्टी है! हर काम करने योग्य स्त्री-पुरूष को रोज़गार मिलने पर ही उसका ‘जीने का अधिकार’ सुनिश्चित होता है। ‘मनरेगा’ में सरकार ने पहली बार माना था कि रोज़गार की गारण्टी देना उसकी ज़िम्मेदारी है किन्तु यह योजना भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी। न केवल ग्रामीण और न केवल 100 दिन बल्कि हरेक के लिए उचित जीवनयापन योग्य पक्के रोज़गार के प्रबन्ध की ज़िम्मेदारी भारतीय राज्य व सरकारों की बनती है। सभी को रोज़गार देने के लिए तीन चीज़ें चाहिए (1) काम करने योग्य हाथ (2) विकास की सम्भावनाएँ (3) प्राकृतिक संसाधन। क्या हमारे यहाँ इन तीनों चीज़ों की कमी है? जी, नहीं! क़तई नहीं! पूँजीवादी राज्य सभी को रोज़गार दे ही नहीं सकता। मगर इस व्‍यवस्था के दायरे में जो नौकरियाँ देना सम्भव है, उनके लिए भी सरकारों पर केवल जनान्दोलनों के माध्यम से ही दबाव बनाया जा सकता है। बहरहाल हरियाणा प्रदेश में दोबारा से जजपा के समर्थन से भाजपा की सरकार बन चुकी है। शिक्षा और रोज़गार जैसे मुद्दों के लिए जनता को फिर से अपनी कमर कस लेनी होगी।

मज़दूर बिगुल, नवम्बर 2019


 

‘मज़दूर बिगुल’ की सदस्‍यता लें!

 

वार्षिक सदस्यता - 125 रुपये

पाँच वर्ष की सदस्यता - 625 रुपये

आजीवन सदस्यता - 3000 रुपये

   
ऑनलाइन भुगतान के अतिरिक्‍त आप सदस्‍यता राशि मनीआर्डर से भी भेज सकते हैं या सीधे बैंक खाते में जमा करा सकते हैं। मनीऑर्डर के लिए पताः मज़दूर बिगुल, द्वारा जनचेतना, डी-68, निरालानगर, लखनऊ-226020 बैंक खाते का विवरणः Mazdoor Bigul खाता संख्याः 0762002109003787, IFSC: PUNB0185400 पंजाब नेशनल बैंक, निशातगंज शाखा, लखनऊ

आर्थिक सहयोग भी करें!

 
प्रिय पाठको, आपको बताने की ज़रूरत नहीं है कि ‘मज़दूर बिगुल’ लगातार आर्थिक समस्या के बीच ही निकालना होता है और इसे जारी रखने के लिए हमें आपके सहयोग की ज़रूरत है। अगर आपको इस अख़बार का प्रकाशन ज़रूरी लगता है तो हम आपसे अपील करेंगे कि आप नीचे दिये गए बटन पर क्लिक करके सदस्‍यता के अतिरिक्‍त आर्थिक सहयोग भी करें।
   
 

Lenin 1बुर्जुआ अख़बार पूँजी की विशाल राशियों के दम पर चलते हैं। मज़दूरों के अख़बार ख़ुद मज़दूरों द्वारा इकट्ठा किये गये पैसे से चलते हैं।

मज़दूरों के महान नेता लेनिन

Related Images:

Comments

comments