नांगलोई और मंगोलपुरी में मज़दूर माँगपत्रक अभियान की नये सिरे से शुरुआत
उत्तर-पश्चिम दिल्ली के नांगलोई जाट और मंगोलपुरी क्षेत्र में 27 और 28 मई को कारखानों के विभिन्न पेशों के मज़दूरों का माँगपत्रक बनाकर अभियान चलाया गया।

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नांगलोई जाट विधानसभा क्षेत्र में उद्योगनगर और डी.आई.डी.सी. दिल्ली सरकार द्वारा घोषित औद्यागिक इलाक़ा है। इसके अलावा निहाल विहार, नांगलोई, ज्वालापुर में मज़दूरों की रिहायश है। वहाँ भी छोटी-छोटी बहुत-सी फ़ैक्टरियाँ हैं। मंगोलपुरी में भी दो घोषित औद्योगिक इलाक़े हैं, मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फ़ेस-1 व 2; मंगोलपुरी रिहायशी इलाक़े में भी छोटी.छोटी बहुत-सी फ़ैक्टरियाँ हैं। इन दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में ज़्यादातर पीवीसी का जूता-चप्पल बनाने का काम होता है। इसके अलावा ऑटो पार्टस, प्लास्टिक के सामान, गारमेण्ट, दवा आदि की भी फ़ैक्टरियाँ हैं। इन फ़ैक्टरियों में ज़्यादातर काम ठेका या पीस रेट पर होता है। अधिकांश फ़ैक्टरियों में 10 से 12 घण्टे का कार्यदिवस है। वेतन के नाम पर हेल्पर पुरुष को 4000-4500 रुपये प्रतिमाह और माहिल मज़दूर को 3500-4000 रुपये मिलते हैं। अप्रैल से दिल्ली सरकार ने काग़ज़ों पर न्यूनतम वेतन बढ़ा दिया है (अकुशल को 8554 रुपये और कुशल को 10374 रुपये प्रतिमाह) जबकि मिलता इसका आधा है। कार्यस्थल पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इन्तज़ाम नहीं हैं, इसी कारण आये दिन फ़ैक्टरियों में आग लगती रहती है और मज़दूर अपनी ज़िन्दगी गँवाते रहते हैं। अभी हाल में मुण्डका की एक प्लास्टिक फ़ैक्टरी में आग लगी, जिसमें एक मज़दूर की जलकर मौत हो गयी और कई अन्य मज़दूर बुरी तरह जल गये। आग लगने के बाद फ़ैक्टरी मालिक के गुण्डों ने मज़दूरों को परिवार सहित इलाक़े से भगा दिया। इलाक़े में आग लगने की घटनाएँ होती रहती हैं और ज़्यादातर मामलों को मालिक और स्थानीय पुलिस-श्रम विभाग मिलकर दबा देते हैं।

ऐसी गुलामों जैसी ज़िन्दगी में मज़दूर अलग-अलग कुछ नहीं कर सकता है और न ही एक फ़ैक्टरी के 50-100 मज़दूर कुछ कर सकते हैं। इसलिए दिल्ली कामगार यूनियन और उद्योग नगर मज़दूर यूनियन ने इलाक़े के सभी मज़दूरों का संयुक्त माँगपत्र बनाकर अभियान की शुरुआत की है, ताकि पूरे औद्योगिक क्षेत्र के मज़दूरों की साझा माँगों जैसे न्यूनतम वेतन, ठेका प्रथा समाप्त करने, डबल रेट से ओवरटाइम, पीएफ़ व ईएसआई आदि पर मज़दूरों को एकजुट किया जा सके।

अभियान की शुरुआत 28 मई को सुबह उद्योग नगर से की गयी। मज़दूरों के माँगपत्रक का परचा निकालकर छोटी.छोटी नुक्कड़ सभाएँ करते हुए परचे बाँटे गये। 29 मई को मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र फ़ेस-1 में भी ऐसा ही अभियान चलाया गया। उद्योग नगर में काम करने वाले मज़दूर ज़्यादातर ठेका या पीस रेट पर काम करते हैं, जहाँ इनका भयंकर शोषण होता है। आठ-दस सालों से काम कर रहे मज़दूरों को भी नियुक्ति पत्र, पहचान कार्ड व वेतन पर्ची नहीं दी जाती। पी.एफ़ व ई.एस.आई. तथा बोनस व सामाजिक सुरक्षा से वे वंचित हैं। राजधानी दिल्ली में सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन तक मज़दूरों को नहीं मिलता है। पाँच-दस दिन काम करके जाने वाले मज़दूर को ठेकेदार एक पैसा भी नहीं देता है। अक्सर ठेकेदार काम में घाटा दिखाकर कई मज़दूरों का पैसा हड़प लेता है। परचा वितरण के दौरान कई मज़दूरों ने इन घटनाओं का ज़िक्र किया। कहने को तो इलाक़े में एटक और सीटू जैसी केन्द्रीय यूनियनें मौजूद हैं, लेकिन ये भी मज़दूरों को ठगने और बीच-बीच में रस्मअदायगी करने का ही काम करती हैं। इसके अलावा छोटी.छोटी यूनियनें भी हैं जो अपनी दुकान खोलकर बैठी हैं और मज़दूरों को ठगने और लूटने का काम कर रही हैं। इसलिए बहुत से मज़दूर यूनियन नाम सुनकर ही भागते हैं। मालिक और ठेकेदार भी यूनियन के खि़लाफ़ दुष्प्रचार करते रहते हैं।

मंगोलपुरी में कार्यस्थल पर सुरक्षा की हालत उद्योग नगर से भी बदतर हैं। बहुत-सी फ़ैक्टरियों की इमारतें बहुत जर्जर हैं। यहाँ ज़्यादातर जूते-चप्पल की फ़ैक्टरियाँ हैं। मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी की विधायक राखी बिड़ला हैं, लेकिन मज़दूरों के साथ होने वाले भ्रष्टाचार और अन्याय पर वे चुप रहती हैं। मंगोलपुरी मज़दूर यूनियन और दिल्ली कामगार यूनियन ने मज़दूरों के बीच कहा कि चुनावी पार्टियाँ तथा नक़ली ट़ेड यूनियनें मज़दूरों के संघर्ष को रोकने का काम करती हैं। इसलिए मज़दूरों को अपनी इलाक़ाई एकता क़ायम करके ही हक़-अधिकार मिल सकते हैं। उद्योग नगर मज़दूर यूनियन और मंगोलपुरी मज़दूर यूनियन इलाक़े के मज़दूरों की एकजुट करने का प्रयास कर रही हैं। अधिकांश फ़ैक्टरियों में मज़दूरों की एक जैसी समस्याएँ हैं, इसलिए इलाक़े के मज़दूरों को साझा माँगपत्रक बनाकर एकजुट किया जा सकता है और मज़दूरों की जुझारू यूनियन बनायी जा सकती है।

 

 

मज़दूर बिगुल, जून 2014

 


 

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