ऑटोनियम इण्डिया के परमानेण्ट मज़दूरों का उत्पीड़न के विरुद्ध संघर्ष

पहली मार्च को बहरोड़ औद्योगिक क्षेत्र (राजस्थान) की ऑटोनियम इण्डिया प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी की परमानेण्ट मज़दूर यूनियन के उपाध्याक्ष योगेन्द्र यादव ने कम्पनी गेट पर अपने ऊपर पेट्रोल छिड़का और आत्महत्या करने की कोशिश की। बेहोश होने पर उन्हें आई.सी.यू. में भरती करवाया गया। वहीं दूसरी तरफ़ बाक़ी के 33 परमानेण्ट मज़दूर कम्पनी के अन्दर ही काम रोक कर बैठ गये हैं और माँग कर रहें हैं कि कम्पनी मज़दूरों को बदले की भावना से तंग-परेशान करना बन्द करे, ताकि कोई और मज़दूर कम्पनी प्रबन्धन से तंग आकर आत्महत्या के लिए मजबूर न हो।
इससे पहले योगेन्द्र यादव को मैनेजमेण्ट किसी न किसी बहाने परेशान करता रहा। कभी उन्हें टपूकड़ा प्लाण्ट में जाने को कहा जाता तो कभी लैब में भेज दिया जाता तो कभी गेट पर बैठाकर रखा जाता। मज़दूर कम्पनी प्रबन्धन से पहले से ही श्रम क़ानूनों व कम्पनी क़ानूनों (स्टैण्डिंग ऑर्डर के मुताबिक़) को लागू करने की माँग कर रहे हैं ताकि उन्हें बेवजह तंग-परेशान न किया जाये।
परमानेण्ट मज़दूर 2019 से ही कम्पनी में छँटनी, ज़बरन ट्रांसफ़र, झूठे मुक़दमों, धमकियों के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं। ऑटोनियम इण्डिया, बहरोड़ की यूनियन के अध्यक्ष जितेन्द्र यादव ने बताया कि कम्पनी में यूनियन के नेतृत्व व अन्य मज़दूरों को पिछले काफ़ी समय से नाजायज़ तरीक़े से परेशान किया जा रहा है। इसको लेकर डी.सी. ऑफ़िस को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। 2014 से अभी तक कम्पनी ने किसी मज़दूर को बोनस नहीं दिया है, उल्टा बदले की भावना से कोरोना काल में यूनियन अध्यक्ष जितेन्द्र यादव के तबादले की घोषणा कर दी।
फ़िलहाल क़रीब 30 स्थायी मज़दूरों का गेट बन्द कर दिया गया है। महज़ 2-4 यूनियन के लोग ही अन्दर काम करने गये हैं। सीटू से सम्बद्ध इस यूनियन के 33 सदस्य हैं जिसने 2019 में कॉण्ट्रैक्ट के 33 अन्य मज़दूरों को सदस्यता दी थी, लेकिन कम्पनी ने सभी कॉण्ट्रैक्ट मज़दूरों को बाहर कर दिया था, जिसका अभी तक केस चल रहा है।
ऑटोनियम कम्पनी में दूसरी यूनियन भी है जो बीएमएस से सम्बद्ध है और उसके 22 सदस्य हैं। वे अभी भी कम्पनी में काम कर रहे हैं और उनके अलावा क़रीब 100 ठेका मज़दूर काम कर रहे हैं।

मज़दूर बिगुल, मार्च 2021


 

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