लुधियाना में राजीव गाँधी कालोनी के हज़ारों मज़दूर परिवार बस्ती उजाड़ने के खि़लाफ़ संघर्ष की राह पर

लखविन्दर

पिछले कुछ महीनों से राजीव गाँधी कालोनी उजाड़ने की तैयारियाँ पूरे ज़ोरों से की जा रही हैं। 21 अप्रैल को कालोनी तोड़ने के लिए नगर निगम ने भारी संख्या में पुलिस बुलाकर कालोनी पर हमला किया था। कुछ घर तोड़ भी दिये गये। लेकिन लोगों के बहादुरी भरे सख़्त विरोध के चलते प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। लेकिन प्रशासन चुप नहीं बैठा है। कभी भी कालोनी तोड़ने की कार्रवाई दुबारा हो सकती है। पूँजीपतियों द्वारा यह कालोनी ख़ाली करवाने की अपीलों पर हाईकोर्ट का आदेश भी आ चुका है कि यहाँ के निवासियों को रहने के लिए कोई अन्य जगह देकर यह जगह ख़ाली करवायी जाये।

इस कालोनी में दस हज़ार से अधिक परिवार रहते हैं। कालोनी निवासियों के राशन कार्ड, वोटर कार्ड, बिजली मीटर, आधार कार्ड बने हुए हैं। यहाँ धर्मशाला के निर्माण व अन्य कामों के लिए सरकारी ग्राण्टें भी जारी होती रही हैं। जब कारख़ाना मालिकों को ज़रूरत थी, तो यहाँ फ़ोकल प्वाइण्ट के बिल्कुल बीच सरकारी ज़मीन पर मज़दूर बस्ती बसने दी गयी। लोगों ने अपनी मेहनत से पक्के घर बना लिये। अब जब पूँजीपतियों को इस बेशक़ीमती ज़मीन की ज़रूरत आन पड़ी है, तो कालोनी तोड़ने की कोशिश की जा रही है।

लोगों को जो फ़्लैट देने की बात कही जा रही है, वे भी रहने लायक नहीं हैं। 25 गज की जगह में चार मंजि़ला इमारत खड़ी की गयी है। ये चार फ़्लैट अलग-अगल अलॉट किये जायेंगे। ये फ़्लैट बेहद संकरे और नीची छत वाले हैं। यहाँ एक परिवार का रह पाना भी सम्भव नहीं है। और ये फ़्लैट हासिल करने के लिए लोगों के सामने ऐसी शर्तें रखी जा रही हैं कि बहुसंख्यक कालोनी निवासियों के लिए ये शर्तें पूरा कर पाना सम्भव नहीं है। और घर के बदले घर भी नहीं दिये जा रहे, बल्कि दिये जा रहे फ़्लैटों की क़ीमत माँगी जा रही है।

पूँजीपति बैंकों के क़र्ज़ हड़प कर जाते हैं। वे सरकारी ज़मीनों पर सरेआम क़ब्ज़े करते हैं, कोई कार्रवाई नहीं होती। एक तरफ़ पूँजीपतियों के लिए भारी क़र्ज़ माफ़ी और दूसरी ओर ग़रीबों की बस्तियों का उजाड़ना।  शासकों का यही चरित्र है। होना तो यह चाहिए था कि लोगों को उजाड़ने की जगह इस कालोनी को क़ानूनी घोषित किया जाये। लोगों को सारी सहूलियतें दी जायें। स्वास्थ्य, शिक्षा, साफ़-सफ़ाई, पक्की गलियाँ, बिजली-पानी, आदि के पुख्ता प्रबन्ध किये जायें। लेकिन सरकार तो लोगों को उजाड़ने पर आमादा है।

कारख़ाना मज़दूर यूनियन की पहलक़दमी पर ‘राजीव गाँधी कालोनी उजाड़े विरोधी संघर्ष कमेटी’ का गठन किया गया है। इसके नेतृत्व में लोग संघर्ष की राह पर है। ‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ लोगों के कन्धे से कन्धा मिलाकर संघर्ष में साथ दे रहा है। उजाड़े के खि़लाफ़ हाईकोर्ट में भी अर्जी दायर की गयी है। हाईकोर्ट में कुछ जनपक्षधर वकील निशुल्क केस लड़ रहे हैं। लेकिन मसला तो जनता की एकजुटता से ही हल होना है। जनता के सख़्त एकजुट संघर्ष से ही हुक्मरानों की उजाड़े की साजि़शों को नाकाम किया जा सकता है। संघर्ष कमेटी इसी राह पर है। जनता को लामबन्द कर रही है। कुछ धन्धेबाज़ तथाकथित प्रधानों ने कालोनी बचाने के नाम पर लोगों से हज़ारों रुपए इकट्ठे करने शुरू कर दिये हैं। यह उनका पैसा कमाने का पुराना तरीक़ा है। वे बिजली, पानी, साफ़-सफ़ाई, आधार कार्ड आदि मसलों से जुड़ी हर समस्या पर लोगों से पैसे ऐंठते रहे हैं। हज़ारों परिवारों पर टूट पड़े उजाड़े के इस क़हर को भी ये धन्धेबाज़ पैसा कमाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। ये संघर्ष कमेटी के खि़लाफ़ तरह-तरह का झूठ प्रचारित कर रहे हैं। लेकिन कालोनी निवासी इनकी असलियत पहचान रहे हैं। कुछ लोगों को छोड़कर बाक़ी लोग इनके चंगुल से आज़ाद हैं।

दस हज़ार से अधिक परिवारों के उजाड़े की यह सरकारी कोशिश कोई छोटा मसला नहीं है। सभी इंसाफ़पसन्द लोगों को इस उजाड़े के खि़लाफ़ संघर्ष की राह चले लोगों के कन्धे से कन्धा मिलाने के लिए आगे आना चाहिए, उनके हक़ में ज़ोरदार आवाज़ उठनी चाहिए।

‘राजीव गाँधी कालोनी उजाड़े विरोधी संघर्ष कमेटी’ के आह्वान पर चेतावनी रैली हुई

बिगुल संवाददाता, लुधियाना

उजाड़े की सरकारी कोशिशों के खि़लाफ़ गुज़री 9 जुलाई को राजीव गाँधी कालोनी उजाड़ा विरोधी संघर्ष कमेटी के आह्वान पर चेतावनी रैली की गयी। इस रैली के ज़रिये कालोनी निवासी मज़दूरों-मेहनतकशों ने लुधियाना प्रशासन को सख़्त चेतावनी दी है कि अगर उन्हें ज़बरदस्ती उजाड़ने की कोशिश की गयी तो वे इसके खि़लाफ़ किसी भी हद तक सख़्त संघर्ष लड़ने को तैयार हैं।

वक्ताओं ने कहा कि बड़े अमीरों द्वारा सरकारी सम्पत्तियों पर किए क़ब्ज़ों के खि़लाफ़ सरकार कोई कार्रवाई नहीं करती लेकिन ग़रीबों को उजाड़ने के लिए हमेशा कमर कसे रहती है। इससे सरकारी व्यवस्था का पूँजीपरस्त और जनविरोधी चरित्र स्पष्ट होता है। संघर्ष
कमेटी का कहना है कि सरकार का रवैया बिल्कुल भी सहन नहीं किया जायेगा। लोग अपनी जि़न्दगी-भर की ख़ून-पसीने की कमाई से बनाये घर नाजायज़ तौर पर तोड़े जाने के खि़लाफ़ सख़्त से सख़्त संघर्ष लड़ेंगे।

चेतावनी रैली को ‘राजीव गाँधी कालोनी उजाड़े विरोधी संघर्ष कमेटी’ के संयोजक राजविन्दर के अलावा लखविन्दर, तेजपाल, विजेन्दर कुमार, विश्वनाथ (बाबा), गोपाल, हरीनाथ, नारायण दास आदि ने सम्बोधित किया।

 

मज़दूर बिगुल, जुलाई 2017

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