पूँजी की ताकत के आगे हड़ताल के लिए जरूरी है वर्ग एकजुटता!

बिगुल संवाददाता

हड़ताल मजदूर वर्ग का एक ऐसा जबर्दस्त हथियार है जिसकी ताकत के दम पर वह मालिक वर्ग को अपनी व्यवहारिक माँगों को पूरा करने के लिए घुटने टेकने को मजबूर कर देता है। 1990 के दशक से जारी निजीकरण-उदारीकरण की नीतियों के साथ-साथ मालिक वर्ग ने ऐसे एक खास तरीके की रणनीति तैयार की है जिससे कि किसी एक फ़ैक्टरी में हड़ताल होने से उनकी सेहत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। वो तरीका है एक बड़े कारखाने को सौ छोटे कारखानों में बाँट देना। ऐसी ही एक फ़ैक्टरी हड़ताल की घटना हमारे सामने है जो हड़ताल के बारे में कुछ जरूरी सबक देती है।

घटना – 28 फरवरी 2013 को ओरिएण्ट क्राफ़्ट प्लांट नम्बर 3, 5 सेक्टर 37 हीरो होण्डा चौक गुड़गांव में 11 बजे के आसपास। होजरी के एक खास पीस के रेट को लेकर कारीगर और ठेकेदार में बहस हो गई। कारीगर का कहना था कि इस पीस का रेट 1.25 रु. लेंगे। ठेकेदार 80 पैसे देने को तैयार था। मगर ठेकेदार एक रुपये से ज्यादा देने को तैयार न हुआ, जिससे की कारीगरों की तीन लाइनों ने काम का बहिष्कार कर दिया। ध्यान दें इस पूरे प्लांट में पीस रेट के करीब 1800 कारीगर हैं जो सात ठेकेदारों के माध्यम से काम पाते है। तीन लाइनों के कारीगरों के काम छोड़ने के पश्चात तीन दाँये व तीन बाँये हाथ की लाइन के कारीगरों ने भी काम छोड़ दिया। 2 बजे तक प्लांट नम्बर 3, 5 के तीनों डिपार्टमेंट के कारीगरों ने काम छोड़ दिया। एक आम राय बन गई कि‍ पीस का रेट बढ़ाया जाए क्योंकि यहाँ पर साधारण पीस रेट 60 पैसे की दर से मिलता था। उनकी माँग थी कि अब उसका रेट 80 पैसे किया जाए। कारीगरों ने 20 पैसे 1 पीस पर बढ़ाने की ठोस माँग ठेकेदारों के सामने रखी। शाम 4 बजे तक यह माँग ओरिएण्ट क्राफ़्ट की अन्य दो कम्पनी प्लांट नम्बर 9,13 सेक्टर 37 व प्लांट नम्बर 7 पी सेक्टर 34 के मजदूरों तक पहुँच गई और इस माँग के समर्थन में उन्होंने भी काम छोड़ दिया। शाम साढ़े चार बजे तक इस बहिष्कार ने हड़ताल का रूप ले लिया।

हिस्से में बांटी फ़ैक्टरी – कम्पनी के अन्दर पीस रेट के कारीगरों के काम परिस्थिति कुछ इस प्रकार है। पीस रेट के कारीगरों का सीधे मालिक से कोई वास्ता न रहे इसलिए मालिक कारीगरों को ठेकेदार के माध्यम से भर्ती करते हैं। प्लांट नम्बर 7 पी में एक ठेकेदार है जिसके मातहत करीब 450 कारीगर है। प्लांट नम्बर 3, 5 में 7 ठेकेदार हैं जिनके नीचे 1800 कारीगर हैं। प्लांट नम्बर 9, 13 में आधे कारीगर कम्पनी की तरफ से है और आधे पीस रेट पर। ओरिएण्ट क्राफ़्ट की शाखाएँ और भी है। 9 पी व 9 ए, इसके अलावा और भी मगर उनकी जानकारी नहीं है।

प्लांट नम्बर 7 पी में 13 लाइन  हैं जिनमें करीब 450 कारीगर काम करते हैं। हर लाइन के कारीगरों ने अपना ग्रुप लीडर चुन रखा है जो कि ठेकेदार से काम लाने, रेट तय करने, भुगतान करने व कागज सम्बन्धों अन्य कामों को देखने का काम करता है जिसके लिए सभी कारीगर मिलकर अपने हिस्से से बराबर का हिस्सा देते हैं। इसके अतिरिक्त टीम लीडर जो काम करता है वो उसकी अतिरिक्त कमाई होती है। इनके संगठन का मुख्य आधार यही है। इसके अलावा इनका कोई आपसी संगठन या किसी ट्रेड यूनियन से कोई वास्ता नहीं है।

संघर्ष का रूप-इस हड़ताल में मजदूरों ने संघर्ष को किसी योजनाबद्ध तरीके से नहीं चलाया। बस 28 फरवरी शाम 4 बजे अघोषित रूप से हड़ताल कर दी। सभी कारीगर घर चले गए। 2  मार्च तक काम शुरू नहीं हुआ, और मजदूर पीस रेट के 20 पैसा बढ़ाने की माँग पर अड़े रहे। फिर 4 मार्च को प्लांट नम्बर 3,5 में मालिक सुधीर ढींगरा ने आकर खुले रूप से कह दिया कि कोई रेट नहीं बढ़ेगा। जिसको काम करना है करे नहीं तो अपना हिसाब लेकर घर जाए। हड़ताल का संगठित रूप नहीं था। सभी कारीगरों के व्यक्तिगत विचार थे कि रेट बढ़ना चाहिए। ऐसे में कोई नेतृत्व नहीं था, कोई मीटिंग नहीं हुई, कोई सभा नहीं हुई। बस यही भावना काम कर रही थी कि वे काम शुरू कर देंगे तो हम भी शुरू कर देंगे।

आखिर 5 मार्च तक मालिक ने सभी कारीगरों को फुल एण्ड फ़ाइनल हिसाब दे दिया। और मजदूरों को नसीहत दी कि काम करना हो तो कल आकर मशीन चलाने लग जाना। 6 मार्च को करीब 20 प्रतिशत कारीगरों को फोन द्वारा वापस बुला लिया गया।

निष्कर्ष- साफ़ है ये हड़ताल मजदूरों के लिए कुछ जरूरी सबक छोड़ गई कि बिना यूनियन और सही नेतृत्व के मजदूरों का संघर्ष ज्यादा लम्बा नहीं चल सकता । दूसरा अलग-अलग प्लाण्‍ट के नाम पर बँटे मजदूरों की एकजुटता कायम करने के लिए सचेतना प्रयास करने चाहिए क्योंकि हड़ताल मजदूर संघर्ष का मुख्य हथियार हैं ऐसे में हमें गारमेण्‍ट सेक्टर के सभी मजदूरों को एक साथ लेकर लम्बी लड़ाई की तैयारी करनी चाहिए। हमारी काम की परिस्थितियां एक है, हमारी माँगें साझा हैं इसलिए हमें संघर्ष के लिए भी पेशागत और इलाकाई यूनियन बनानी चाहिये। नही तो ऐसी हड़ताल में हमें सिर्फ हार ही मिलेगी।

 

मज़दूर बिगुलमार्च  2013

 


 

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