आँगनवाड़ीकर्मियों ने चेतावनी प्रदर्शन के ज़रिए दी दिल्ली के दिल में दस्तक!
बिन हवा न पत्ता हिलता है, बिन लड़े न कुछ भी मिलता है!

– वृषाली

7 सितम्बर को दिल्ली की आँगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने दिल्ली सचिवालय पर चेतावनी प्रदर्शन का आयोजन किया। यह चेतावनी प्रदर्शन ‘दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्‍पर्स यूनियन’ के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस चेतावनी प्रदर्शन में हज़ारों-हज़ार की संख्या में यूनियन से जुड़ी कार्यकर्ताओं (वर्कर) और सहायिकाओं (हेल्पर) ने गर्मजोशी के साथ भागीदारी की। इस चेतावनी प्रदर्शन को ‘बिगुल मज़दूर दस्ता’ ने न केवल पुरज़ोर समर्थन दिया बल्कि इसमें शिरकत भी की। साथ ही, भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी ने भी इस प्रदर्शन में भागीदारी की और इसे अपना पूर्ण समर्थन दिया।
केन्द्र और दिल्ली सरकार दिल्ली की आँगनवाड़ीकर्मियों के हितों के साथ क़तई न्याय नहीं कर रही है। आँगनवाड़ीकर्मियों के हक़ों पर सरेआम डाके डाले जा रहे हैं। महँगाई बढ़ रही है लेकिन आँगनवाड़ीकर्मियों के मानदेय में कटौती की जा रही है। केजरीवाल की राज्य सरकार से लेकर केन्द्र की मोदी सरकार तक झूठे वायदे करके आँगनवाड़ीकर्मियों को बरगला रही है। दिल्ली व केन्द्र सरकार आँगनवाड़ीकर्मियों को सस्ते श्रम के स्रोत के तौर पर इस्तेमाल करने में लगी हुई है। यही कारण है कि आँगनवाड़ीकर्मियों को इतनी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा। चेतावनी प्रदर्शन के लिए सुबह 9 बजे से ही राजघाट पर आँगनवाड़ीकर्मियों ने इकट्ठा होना शुरू कर दिया था। इसके बाद हज़ारों की गिनती में बैनर-झण्डों-नारों के साथ महिलाकर्मियों ने दिल्ली सचिवालय की ओर कूच किया। विभिन्न छात्र-युवा-नागरिक जन-संगठनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भी आँगनवाड़ी यूनियन के समर्थन में अपनी हाज़िरी दर्ज करायी तथा इनमें से बहुतों ने वॉलण्टियर के तौर पर चेतावनी प्रदर्शन में अपना सहयोग भी दिया। दिल्ली सचिवालय के बैरिकेड पर पहुँचकर स्टेज लगाया गया। यहाँ आँगनवाड़ी यूनियन की सभा चली। मंच संचालन का कार्यभार प्रियम्बदा और विशाल ने सँभाला। सभा को विभिन्न वक्ताओं ने सम्बोधित किया तथा राज्य व केन्द्र सरकारों की आँगनवाड़ी विरोधी और जन-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ अपना रोष प्रकट किया। बीच-बीच में आँगनवाड़ी यूनियन की सांस्कृतिक टीम और ‘विहान सांस्कृतिक मंच’ के द्वारा जोशीले गीत भी पेश किये गये। विभिन्न वक्ताओं ने अपनी तक़रीरों में आँगनवाड़ीकर्मियों के संघर्ष के आगे के रास्ते और आज के सामाजिक-राजनीतिक माहौल पर खुलकर बातचीत की।
‘दिल्ली स्टेट आँगनवाड़ी वर्कर्स एण्ड हेल्पर्स यूनियन’ की अध्यक्षा शिवानी कौल ने अपनी बातचीत में आँगनवाड़ीकर्मियों के आज के हालात और आन्दोलन के आगे के रास्ते पर विस्तार से बात की। शिवानी ने आँगनवाड़ीकर्मियों के अतीत के संघर्षों की याददिहानी कराते हुए अपनी बातचीत की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि आँगनवाड़ीकर्मियों ने जुझारू संघर्षों और यूनियन के तहत अपनी एकजुटता के बूते ही सरकारों को अतीत में भी हराया था और भविष्य में भी हरायेंगी। शिवानी ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि आँगनवाड़ी महिलाकर्मी पिछले लम्बे समय से कई तरह की परेशानियों का सामना कर रही हैं। लगभग सभी परियोजनाओं में पिछले लम्बे समय से कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को पूरा मानदेय नहीं दिया गया था। कई सारे आँगनवाड़ी केन्द्रों का किराया भी समय से नहीं आ रहा था। कोरोना काल के दौरान जोखिम में ज़मीनी स्तर पर कार्यरत आँगनवाड़ीकर्मियों के लिए समुचित सुरक्षा उपकरणों का इन्तज़ाम भी नहीं किया गया। आँगनवाड़ीकर्मियों ने तमाम अभावों के बावजूद भी कोरोना काल में कड़ी मेहनत की और कोरोना महामारी को हराने में अहम भूमिका निभायी लेकिन केजरीवाल और मोदी दोनों ने ही आँगनवाड़ीकर्मियों के साथ धोखा किया है। शिवानी ने आगे कहा कि हमारा मानदेय पिछली बार 58 दिन चली हड़ताल के बाद अगस्त 2017 में बढ़ाया गया था। इस बढ़ोत्तरी के बाद दिल्ली में आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को क्रमशः रु. 9,678 व रु. 4,839 मानदेय के तौर पर दिया जाना निश्चित हुआ था। वहीं 11 सितम्बर 2018 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सभी स्कीम वर्करों के लिए मानदेय बढ़ोत्तरी की घोषणा की गयी थी। यह घोषणा जुमला साबित हुई और इसमें घोषित राशि के अनुसार आज तक भुगतान नहीं किया गया है। उल्टा इसके बाद दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सितम्बर 2019 में एक अधिसूचना जारी करके अपने हिस्से में से कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में से क्रमशः रु. 900 व रु. 450 घटा दिये हैं। 2017 के मुक़ाबले आँगनवाड़ीकर्मियों पर काम का दबाव काफ़ी बढ़ चुका है। इस दौरान महँगाई में भी बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। इस सबको देखते हुए दिल्ली सरकार द्वारा मानदेय घटाने का यह क़दम सरासर नाजायज़ है। दिल्ली सरकार द्वारा जारी अन्य अधिसूचनाओं के अनुसार आँगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यरत महिलाकर्मियों के कार्यदिवस बढ़ाने और ‘सहेली समन्वय केन्द्र’ में आँगनवाड़ीकर्मियों की सेवाएँ लेने का भी फ़ैसला लिया गया है। एक ओर तो दिल्ली सरकार महिला सशक्तिकरण की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर समेकित बाल विकास परियोजना जैसी ज़रूरी स्कीमों में कार्यरत महिलाकर्मियों को कर्मचारी का दर्जा मिलना तो दूर, उन्हें न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। वहीं केन्द्र में बैठी मोदी सरकार की नयी शिक्षा नीति 2020 के तहत आँगनवाड़ी केन्द्रों को अब प्री-प्राइमरी स्कूलों के रूप में संचालित किया जायेगा। कई राज्यों में नयी शिक्षा नीति 2020 के तहत अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन, अनिल अग्रवाल फ़ाउण्डेशन (वेदान्ता) व बिल एण्ड मेलिण्डा गेट्स फ़ाउण्डेशन जैसे ग़ैर-सरकारी संस्थानों की भागीदारी के साथ इस नीति को अमली जामा पहनाने कि तैयारी शुरू कर दी गयी है। ज़ाहिरा तौर पर यह भविष्य में समेकित बाल विकास परियोजना के निजीकरण की ओर ही संकेत कर रहा है।
भारत की क्रान्तिकारी मज़दूर पार्टी (RWPI) की ओर से सनी सिंह ने भी सभा को सम्बोधित किया। सनी सिंह ने अपने भाषण में सबसे पहले आँगनवाड़ीकर्मियों की सभी माँगों का पुरज़ोर समर्थन किया। आगे उन्होंने कहा कि मौजूदा मोदी सरकार एक फ़ासीवादी सरकार है। भाजपा ने एक तरफ़ तो पूँजीपतियों को देश की जनता के शोषण और लूट की खुली छूट दे दी है तो दूसरी तरफ़ जनता की एकजुटता को तोड़ने के लिए भाजपा और संघ परिवार दिन-रात लगे रहते हैं। मीडिया भी पूरी तरह से सरकार की मुट्ठी में है। जनता के शिक्षा-चिकित्सा जैसे बुनियादी हक़ों पर सरेआम डाका डाला जा रहा है और देश को निरन्तर साम्प्रदायिकता की आग में झोंका जा रहा है। ऐसे में हमारे सामने मौजूदा फ़ासीवादी सरकार का विकल्प खड़ा करने की बड़ी चुनौती है। तमाम अन्य पूँजीवादी चुनावबाज़ पार्टियों के अतीत और उनकी आर्थिक-राजनीतिक नीतियों के चलते हम उनसे बदलाव की कोई उम्मीद नहीं कर सकते हैं। हमें नये सिरे से मज़दूरों-मेहनतकशों, कर्मचारियों और ग़रीब किसानों के जुझारू जन-संगठन खड़े करने होंगे तथा मेहनतकश जनता का अपना स्वतंत्र पक्ष खड़ा करना होगा। इसके बाद यूनियन की वृषाली ने सभा को सम्बोधित किया। उन्होंने अतीत के स्त्री संघर्षों और आज के स्त्री आन्दोलन के समक्ष उपस्थित चुनौतियों पर बात रखी। उन्होंने कहा कि आँगनवाड़ी महिलाकर्मियों को वर्ग-सचेत होने की ज़रूरत है तभी हम अपने संघर्ष को समस्त मेहनतकश जनता की मुक्ति के संघर्ष के साथ जोड़ पायेंगे और पितृसत्ता के साथ-साथ पूँजीवादी ग़ुलामी से भी मुक्ति हासिल कर पायेंगे।
इसके पश्चात सभा में बिगुल मज़दूर दस्ता के योगेश ने अपनी बात रखी। योगेश ने कहा कि हमें अपने रोज़मर्रा के संघर्षों के साथ ही वर्ग-एकजुटता के आधार पर संगठिक होना होगा और इस लुटेरी व्यवस्था का विकल्प भी पेश करना होगा। ज़ाहिरा तौर पर आज के हमारे आन्दोलन भविष्य के हमारे संघर्षों के लिए कार्यशाला के समान हैं। इसके बाद सभा को करावलनगर मज़दूर यूनियन के अनन्त, नौजवान भारत सभा के अरविन्द, दिल्ली घरेलू कामगार यूनियन की अदिति सिंह, बवाना औद्योगिक क्षेत्र मज़दूर यूनियन के भारत ने सम्बोधित किया। सभी वक्ताओं ने अपनी यूनियनों और संगठनों की ओर से आँगनवाड़ी यूनियन की सभी माँगों का मुखर समर्थन किया। आँगनवाड़ी यूनियन की सक्रिय कार्यकर्ताओं सुनीता, सुनीता रानी, पायल और मनीषा ने भी सभा को सम्बोधित किया तथा अपने अनुभव साझा किये। इस पूरे दौरान विहान सांस्कृतिक मंच के सृजन और उनकी टीम ने सभा में समाँ बाँधे रखा।
चेतावनी प्रदर्शन की सभा के अन्त में दिल्ली राज्य की केजरीवाल सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेन्द्रपाल गौतम और केन्द्र की मोदी सरकार की मंत्री स्मृति ईरानी को ज्ञापन सौंपा गया। राजेन्द्र पाल गौतम के साथ यूनियन प्रतिनिधिमण्डल ने यूनियन अध्यक्षा शिवानी के नेतृत्व में वार्ता की। यूनियन की सभी माँगों पर मंत्री ने ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया। वार्ता में यूनियन ने स्पष्ट कहा कि यदि इस चेतावनी प्रदर्शन के बावजूद भी महिलाकर्मियों की न्यायसंगत और संवैधानिक माँगें पूरी नहीं की गयीं तो दिल्ली की आँगनवाड़ीकर्मी अपने संघर्ष को और भी तेज़ करेंगी।
आँगनवाड़ी महिलकर्मियों के नियमितीकरण की लड़ाई एक लम्बे और जुझारू संघर्ष के बाद ही जीती जा सकती है। और इस संघर्ष को देशव्यापी स्तर पर लड़े जाने की ज़रूरत है। 7 सितम्बर को दिल्ली की आँगनवाड़ी महिलाकर्मियों का चेतावनी प्रदर्शन कुल मिलाकर सफल रहा। यह कर्मचारी के दर्जे की लड़ाई की ओर जीत का एक क़दम है। यह प्रदर्शन साबित करता है कि आन्दोलन की सही दिशा और एकजुट संघर्ष ही हमारी जीत की गारण्टी हो सकते हैं।

दिल्ली की आँगनवाड़ीकर्मियों का माँगपत्रक

1. दिल्ली व केन्द्र सरकार द्वारा आँगनवाड़ीकर्मियों को बेगार खटवाने के लिए ‘सहेली समन्वय केन्द्र’ खोलने की नीति व नयी शिक्षा नीति – 2020 के फ़ैसले वापस लिये जायें। बिना अतिरिक्त वेतन के आँगनवाड़ी महिलाकर्मियों के कार्यदिवस को बढ़ाने का फ़ैसला तत्काल वापस लिया जाये।
2. बढ़ती महँगाई के मद्देनज़र सरकार हमारे मानदेय में तत्काल प्रभाव से बढ़ोत्तरी कर कार्यकर्ता एवं सहायिका के लिए क्रमशः 18,000 रुपये व 12,000 रुपये मानदेय सुनिश्चित करे।
3. सभी आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाये, हमें नियमित किया जाये व श्रम क़ानूनों के अन्तर्गत लाया जाये ताकि हमें रोज़गार की पक्की गारण्टी मिले।
4. सभी आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को ई॰एस॰आई॰, पी॰एफ़॰ व पेंशन जैसी सुविधाएँ मुहैया करायी जायें व सभी आँगनवाड़ी महिलाकर्मियों के लिए सामाजिक सुरक्षा कार्ड जारी किये जायें।
5. दिल्ली में कार्यरत आँगनवाड़ी कर्मियों को पिछले कुछ महीनों से पूरा मानदेय नहीं मिल रहा है, हमारे बकाया मानदेय का तुरन्त भुगतान करो।
6. दिल्ली व केन्द्र सरकार यह सुनिश्चित करें कि केन्द्र सरकार द्वारा घोषित व 1 अक्टूबर 2018 से लागू मानदेय वृद्धि की बकाया राशि (अगस्त 2021 तक 34 महीनों के लिए कार्यकर्ता व सहायिका को क्रमशः 51,000 रुपये व 25,500 रुपये) का तुरन्त भुगतान किया जाये।
7. समेकित बाल विकास परियोजना में ग़ैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) की घुसपैठ और हस्तक्षेप पर तत्काल पाबन्दी लगायी जाये। एनजीओ के निरीक्षण पर रोक लगायी जाये।
8. विधायक व उनके कर्मचारियों द्वारा आँगनवाड़ीकर्मियों को तंग करना बन्द हो, कर्मियों को चुनावी प्रचार आदि में लगाकर किये जा रहे शोषण पर तत्काल रोक लगे।
9. ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के दुर्व्यवहार पर लगाम लगायी जाये।
10. घर-घर टीएचआर बँटवाने के बजाय पोषाहार आवण्टन की पुरानी व्यवस्था बहाल की जाये।
11. कोविड महामारी के दौरान कार्यरत महिलाकर्मियों के लिए सुरक्षा का समुचित इन्तज़ाम किया जाये व उनके संक्रमित होने की स्थिति में उचित इलाज की ज़िम्मेदारी विभाग द्वारा उठायी जाये।
12. ‘समेकित बाल विकास परियोजना’ (आई.सी.डी.एस.) में किसी भी प्रकार के निजीकरण पर रोक लगायी जाये।
13. रजिस्टर व पोषण ट्रैकर ऐप में से केवल एक की एण्ट्री को मान्यता दी जाये।
14. आँगनवाड़ी केन्द्रों व इलाक़ों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री का इन्तज़ाम विभाग द्वारा किया जाये। यह ज़िम्मेदारी आँगनवाड़ीकर्मियों पर नहीं थोपी जाये।
15. आई.सी.डी.एस. योजना में रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती की जाये। सुपरवाइज़र पद पर पदोन्नति (प्रमोशन) आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं में से ही की जाये और योग्य आँगनवाड़ी सहायिकाओं का ‘प्रमोशन’ कार्य-कर्ताओं के तौर पर किया जाये। इस प्रक्रिया को पूरी तरह ‘पारदर्शी’ बनाया जाये।
16. जिन आँगनवाड़ीकर्मियों को ‘पैनल’ या ‘लीव’ पर रखा गया है, उन्हें तत्काल पारदर्शिता के साथ नियमित किया जाये। 2021 में नियमित की गयी पैनल वर्कर्स के लेटर तुरन्त जारी किये जायें।
17. आँगनवाड़ी का बजट बढ़ाया जाये व आँगनवाड़ी केन्द्रों की गुणवत्ता सुधारी जाये। आबादी के अनुसार नये केन्द्र खोले जायें व ‘एडिशनल चार्ज’ का सिस्टम ख़त्म किया जाये।
18. आँगनवाड़ी केन्द्रों के चुनावी पार्टियों द्वारा इस्तेमाल पर रोक लगायी जाये।
19. आँगनवाड़ीकर्मियों की बन्द की गयी पेंशन पुनः बहाल की जाये।
20. आँगनवाड़ी केन्द्रों के किराये का समय पर भुगतान किया जाये।
21. शिक्षा विरोधी और जन-विरोधी ‘नयी शिक्षा नीति – 2020’ रद्द की जाये!
22. ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम – 1955’ में किये गये जनविरोधी बदलाव तत्काल रद्द किये जायें।

मज़दूर बिगुल, अक्टूबर 2021


 

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